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Stress Relief Methods: भागदौड़ भरी जिंदगी में किसी पुरानी गलती को याद करके पछताना या भविष्य की चिंता में घंटों एक ही बात सोचते रहना आम बात हो गई है. लेकिन जब यही विचार आपकी नींद, काम और मानसिक शांति को प्रभावित करने लगें, तो इसे रिपीटेटिव थिंकिंग (Repetitive Thinking) कहा जाता है.
बार-बार एक ही विचार में उलझने की आदत को माइंडफुलनेस, रेगुलर एक्सरसाइज, पर्याप्त नींद और ‘चिंता का समय’ तय करके दूर किया जा सकता है. विचारों को कागज पर लिखना और वर्तमान गतिविधियों में मन लगाना इस मानसिक चक्रव्यूह को तोड़ने में बेहद मददगार साबित होता है.
क्या होती है रिपीटेटिव थिंकिंग?
किसी घटना, समस्या या गलती पर बिना किसी नतीजे पर पहुंचे बार-बार सोचते रहना ही रिपीटेटिव थिंकिंग है. इसका एक रूप ‘रूमिनेशन’ है, जिसमें व्यक्ति पुरानी बातों या नकारात्मक भावनाओं के जाल में फंसा रहता है. हालांकि यह हर बार किसी गंभीर बीमारी का संकेत नहीं होता, लेकिन लंबे समय तक ऐसा रहने पर चिंता (Anxiety) और अवसाद का खतरा बढ़ सकता है.
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वर्तमान में ध्यान लगाएं और विचार लिखें
इस चक्र को तोड़ने के लिए सबसे पहले अपना ध्यान वर्तमान पर लाएं. पेंटिंग, डांसिंग या चेस जैसे खेल दिमाग को रिसेट करने में मदद करते हैं. हार्वर्ड हेल्थ के अनुसार, परेशान करने वाले विचारों को कागज पर लिखकर सुरक्षित रख देने से मन को शांति मिलती है. आप चाहें तो दिन में 15 मिनट का ‘Worry Time’ तय कर सकते हैं, ताकि बाकी दिन आपका दिमाग शांत रहे.
व्यायाम और बेहतर स्लीप साइकिल
नियमित एक्सरसाइज करने से मस्तिष्क तक ऑक्सीजन का प्रवाह बढ़ता है, जिससे एंग्जायटी कम होती है. इसके साथ ही पर्याप्त नींद लेने से सोचने की क्षमता बेहतर होती है और मानसिक आराम मिलता है. गहरी सांस लेने और माइंडफुलनेस का अभ्यास करने से भी नर्वस सिस्टम शांत होता है. अगर यह समस्या आपकी दैनिक जिंदगी को बहुत ज्यादा प्रभावित कर रही है, तो किसी एक्सपर्ट से सलाह लेना सबसे सही कदम है.
-भारत एक्सप्रेस
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