Holi 2026: होली को आने में अब बस केवल कुछ दिन ही बचे है. 4 मार्च 2026 को पूरे देश में रंगों का यह त्योहार पूरी धूमधाम से मनाया जाएगा. हर तरफ गुलाल की महक और मिठाइयों की खुशबू होगी. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि होली खेलने के बाद आपकी त्वचा और बालों का क्या हाल होता है? बाजार में मिलने वाले उन ‘चमकदार’ रंगों के पीछे छिपे केमिकल, धातु के कण और कांच की धूल असल में हमारी स्किन के लिए किसी दुश्मन से कम नहीं हैं. ये न सिर्फ एलर्जी और जलन पैदा करते हैं, बल्कि पर्यावरण को भी काफी नुकसान पहुंचाते हैं.
तो इस बार क्यों न कुछ नया करें? क्यों न होली के रंगों को अपने किचन में ही तैयार करें? यकीन मानिए, घर पर बने ये नेचुरल रंग न केवल सुरक्षित हैं, बल्कि इन्हें बनाना भी एक मजेदार एक्टिविटी है जिसे आप अपने परिवार और बच्चों के साथ मिलकर कर सकते हैं.
किचन को बनाएं ‘कलर लैबोरेटरी’
आपको बाजार भागने की जरूरत नहीं है. आपके घर के किचन में ही वह जादू छिपा है जिससे आप शानदार, सुरक्षित और खुशबूदार रंग बना सकते हैं.
1. लाल रंग की बात ही कुछ और है:
इसके लिए ‘चुकंदर’ (Beetroot) सबसे बेस्ट है. 2-3 चुकंदर कद्दूकस करें, पानी में उबालें या सीधे ब्लेंडर में पीस लें. इसे छान लें और आपका गहरा लाल रंग तैयार है. अगर आप सूखा गुलाल चाहते हैं, तो इस रस को थोड़ा कॉर्नस्टार्च या आटे में मिलाकर धूप में सुखा लें. गुड़हल (हिबिस्कस) या गुलाब की पंखुड़ियां भी बेहतरीन विकल्प हैं.
2. हल्दी वाला पीला रंग:
हल्दी तो गुणों की खान है ही, यह त्वचा के लिए एंटीसेप्टिक भी है. हल्दी पाउडर को पानी में उबालकर छान लें, फिर इसे बेसन या कॉर्नस्टार्च में मिलाएं. खुशबू के लिए इसमें थोड़ा गुलाब जल भी डाल सकते हैं. गेंदे (Marigold) के फूलों को उबालकर भी बहुत ही वाइब्रेंट पीला रंग मिलता है.
3. हरा-भरा होली का मिजाज:
पालक या धनिया की पत्तियों को अच्छे से धोकर उबालें और पीस लें. यह आपको नेचुरल हरा रंग देगा. अगर आप और भी बेहतर चाहते हैं, तो नीम की पत्तियां उबालें. इससे रंग भी मिलेगा और होली के दौरान त्वचा पर एंटी-बैक्टीरियल सुरक्षा की परत भी चढ़ जाएगी.
4. नीला और गुलाबी का जादू:
नीले रंग के लिए ‘अपराजिता’ (विष्णुकांता) या बटरफ्लाई पी के फूलों का इस्तेमाल करें. इन्हें पानी में भिगोकर रखें, इसका नीला रंग निकल आएगा. वहीं, गुलाबी शेड के लिए चुकंदर के रस को थोड़ा और पतला कर दें या फिर प्याज के छिलकों को उबालें, बहुत ही प्यारा हल्का गुलाबी शेड तैयार हो जाता है.
क्यों है यह एक बेहतर कदम?
जब आप खुद रंग बनाते हैं, तो आप निश्चिंत रहते हैं कि इसमें कोई हानिकारक केमिकल नहीं है. बच्चों को जब आप ये रंग देंगे, तो आपको इस बात का डर नहीं होगा कि कहीं वो इसे आंखों में न डाल लें. यह आपकी त्वचा को नुकसान पहुंचाने के बजाय निखारने का काम करेंगे. साथ ही, ये रंग पर्यावरण के लिए भी पूरी तरह सुरक्षित हैं.
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-भारत एक्सप्रेस
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