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Raksha Bandhan 2025: 4 पौराणिक कहानियां से जुड़ी है राखी की मान्यता… जानें क्या हुआ जब द्रौपदी, इंद्राणी, लक्ष्मी और यमुना ने बांधी थी राखी

Raksha Bandhan 2025 पर जानिए द्रौपदी, लक्ष्मी, इंद्राणी और यमुना से जुड़ी 4 पौराणिक कहानियां, जिन्होंने राखी को रिश्तों से परे सुरक्षा, प्रेम और आस्था का प्रतीक बनाया.

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Raksha Bandhan 2025: राखी मतलब सिर्फ एक धागा नहीं, बल्कि भरोसे, प्यार और सुरक्षा का वादा. रक्षाबंधन के दिन हम इसे भाई-बहन के रिश्ते से जोड़ते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि पुरानी कथाओं में ये धागा देवताओं, राक्षसों और राजाओं तक की कहानियों में जुड़ा है? चलिए जानते हैं 4 ऐसी दिलचस्प पौराणिक कहानियां, जो राखी को एक नया मतलब देती हैं.

कृष्ण और द्रौपदी: साड़ी का टुकड़ा बना रक्षा-सूत्र महाभारत के समय की बात है, जब श्रीकृष्ण ने शिशुपाल का वध किया तो उनके हाथ में चोट लग गई. द्रौपदी ने बिना सोचे अपनी साड़ी का किनारा फाड़कर उनकी उंगली पर बांध दिया. यह सिर्फ कपड़ा नहीं था, बल्कि रक्षा और स्नेह का वादा था. बाद में चीरहरण के समय कृष्ण ने उसी वादे को निभाते हुए द्रौपदी की लाज बचाई.

इंद्र और इंद्राणी: युद्ध के बीच मिला सहारा जब इंद्र असुरों से हारने की कगार पर थे, उनकी पत्नी इंद्राणी ने मंत्रों से अभिमंत्रित धागा उनकी कलाई पर बांधा. यह रक्षा-सूत्र श्रावण पूर्णिमा के दिन बांधा गया था. कहते हैं, इसके बाद इंद्र को विजय मिली. यह साबित करता है कि राखी सिर्फ भाई-बहन नहीं, बल्कि किसी भी रिश्ते में सुरक्षा का वादा हो सकती है.

वामन, बलि और लक्ष्मी: प्रेम का अनोखा बंधन भगवान विष्णु वामन अवतार में राजा बलि से तीन पग भूमि मांगकर उन्हें वचन निभाने के लिए बांध लिया. तब लक्ष्मी जी ने ब्राह्मण स्त्री का रूप लेकर बलि को राखी बांधी और रक्षा का वचन लिया. बदले में बलि ने विष्णु को हमेशा अपने साथ रखने का वचन मांगा. यह कहानी दिखाती है कि राखी परमात्मा और भक्त के रिश्ते में भी बंधन बना सकती है.

यम और यमुना: अमरता का आशीर्वाद यमराज कई सालों बाद अपनी बहन यमुना से मिलने आए. यमुना ने प्रेम से उन्हें भोजन कराया और राखी बांधी. प्रसन्न होकर यमराज ने वचन दिया कि जो भाई अपनी बहन से राखी बंधवाएगा और उसकी रक्षा करेगा, उसे लंबी उम्र मिलेगी. यही से भाई-बहन के इस त्योहार को अमरता का आशीर्वाद भी जुड़ गया.

इन कहानियों से साफ है कि राखी सिर्फ रिश्तों में धागा बांधने का नाम नहीं, बल्कि भरोसे, प्यार और सुरक्षा की निशानी है. चाहे वह भाई-बहन हों, पति-पत्नी, दोस्त या यहां तक कि देवता और भक्त, राखी का वादा हर जगह निभाया गया है.

आज भी राखी का महत्व उतना ही है जितना पौराणिक समय में था. फर्क सिर्फ इतना है कि अब इसके रंग, डिजाइन और तरीके बदल गए हैं, लेकिन इसमें बंधा हुआ प्यार और वचन वही पुराना है, जो पीढ़ियों से चलता आ रहा है.

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-भारत एक्सप्रेस 



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