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Sadbhavana Diwas 2025: पसंद नहीं थी पॉलिटिक्स, फिर भी बने प्रधानमंत्री! राजीव गांधी की जयंती पर जानें अनसुने किस्से

भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी का जीवन कई रोचक पहलुओं से भरा रहा. बचपन से लेकर पायलट बनने तक, और फिर राजनीति में कदम रखने तक उनकी यात्रा प्रेरणादायक रही. 20 अगस्त को उनकी जयंती पर पूरा देश उन्हें याद करता है.

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Sadbhavana Diwas 2025: 20 अगस्त को पूरा देश भारत के सातवें प्रधानमंत्री राजीव गांधी को उनकी जयंती पर याद करता है. इस दिन को सद्भावना दिवस के रूप में मनाया जाता है. राजनीति में अनचाहे कदम रखने वाले राजीव गांधी ने तकनीक और आधुनिक भारत की नींव रखी थी. लेकिन उनका जीवन कई ऐसे मोड़ों से भरा रहा, जिन पर यकीन करना मुश्किल है. आइए देखते हैं उनकी ज़िंदगी की कुछ अहम झलकियाँ.

राजीव गांधी का नाम उनकी दादी कमला नेहरू से जुड़ा है. कमला का मतलब मां लक्ष्मी और राजीव का मतलब कमल होता है. मां लक्ष्मी की पूजा में कमल का खास महत्व है, इसलिए उनका नाम राजीव रखा गया.

राजीव पहले वेलहम बॉयज़ स्कूल में पढ़े, फिर दून स्कूल चले गए. आगे की पढ़ाई के लिए कैंब्रिज के ट्रिनिटी कॉलेज और फिर लंदन के इंपीरियल कॉलेज पहुंचे. हालांकि वे अपनी इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी नहीं कर पाए.

राजीव गांधी को वेस्टर्न और हिंदुस्तानी दोनों तरह का संगीत बेहद पसंद था. रेडियो सुनना उनकी आदत थी. साथ ही फोटोग्राफी उनका खास शौक था और वे अक्सर कैमरे के साथ वक्त बिताते थे.

हायर एजुकेशन के दौरान लंदन में उनकी मुलाकात एडविग एंटोनियो माइनो से हुई. 1968 में दोनों ने दिल्ली में शादी की और माइनो का नाम बदलकर सोनिया गांधी रख दिया गया. राजीव ने इसके बाद इंडियन एयरलाइंस में बतौर पायलट काम किया.

Sadbhavana Diwas 2025: राजीव को पॉलिटिक्स पसंद नहीं थी, लेकिन छोटे भाई संजय गांधी की 1980 में प्लेन हादसे में मौत के बाद हालात बदले. राजीव को अमेठी से चुनाव लड़ना पड़ा और यहीं से उनका राजनीतिक सफर शुरू हुआ. 1981 में वे इंडियन यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष बने.

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-भारत एक्सप्रेस 



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