भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला स्पेस मिशन #AxiomMission4 के तहत पृथ्वी से बाहर हजारों कोस दूर अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) पर गए हैं. उन्होंने आज अंतरिक्ष से अपना पहला संदेश भेजा. उन्होंने कहा, “अंतरिक्ष से नमस्कार! मैं अपने साथी अंतरिक्ष यात्रियों के साथ यहां आकर रोमांचित हूं.”
#WATCH | #AxiomMission4 का संचालन कर रहे भारतीय अंतरिक्ष यात्री ग्रुप कैप्टन सुभांशु ने अंतरिक्ष में अपनी यात्रा के बारे में जानकारी देते हुए कहा, “अंतरिक्ष से नमस्कार! मैं अपने साथी अंतरिक्ष यात्रियों के साथ यहां आकर रोमांचित हूं।”
एक खिलौना हंस को लेकर उन्होंने कहा कि भारतीय… pic.twitter.com/JiChRCgrcQ
— ANI_HindiNews (@AHindinews) June 26, 2025
शुभांशु शुक्ला की ओर से यह संदेश भारतीय समयानुसार 26 जून 2025 को दोपहर 2 बजे जारी किया गया.
सुभांशु शुक्ला ने अंतरिक्ष में ही एक खिलौने (हंस) को लेकर भी चर्चा की, जिसे वे अंतरिक्ष में अपने साथ ले गए हैं. उन्होंने बताया कि भारतीय संस्कृति में हंस को ज्ञान का प्रतीक माना जाता है. हंस न केवल सुंदरता और अनुग्रह का प्रतीक है, बल्कि यह बुद्धि और ध्यान केंद्रित करने की क्षमता का भी प्रतीक है.

अंतरिक्ष यात्रा का अनुभव किया बयां
सुभांशु शुक्ला ने अपनी यात्रा के बारे में विस्तार से बताया. उन्होंने कहा, “यह एक अद्भुत मिशन है. जब हम लॉन्च पैड पर थे, तो मुझे लगा कि बस निकल जाएं. लेकिन जब राइड शुरू हुई, तो हमें सीट पर पीछे धकेल दिया गया.” उन्होंने आगे बताया कि अंतरिक्ष में पहुंचने के बाद सब कुछ शांत हो गया और वे वजनहीनता की स्थिति में तैरने लगे.
स्पेस टीम के साथी और उनका सपोर्ट
इस उपलब्धि को सुभांशु शुक्ला ने व्यक्तिगत नहीं, बल्कि एक सामूहिक प्रयास बताया. उन्होंने कहा, “यह हर उस व्यक्ति की उपलब्धि है, जो इस यात्रा का हिस्सा रहा है.” उन्होंने अपने परिवार, दोस्तों और समर्थकों को धन्यवाद दिया, जिन्होंने उन्हें प्रेरित किया.
अंतरिक्ष का अलग वातावरण, चुनौतियां
सुभांशु शुक्ला ने बताया कि अंतरिक्ष में नया वातावरण और नई चुनौतियां हैं. उन्होंने कहा, “यह एक नया अनुभव है, जहां हमें सब कुछ सीखना है, जैसे एक बच्चा नई चीजें सीखता है.” उन्होंने अपने सहयोगियों के साथ इस अनुभव को साझा करने और गलतियां करने से सीखने की बात कही.
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