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Aaj ka Panchang: मार्गशीर्ष माह की त्रयोदशी पर सोम प्रदोष व्रत, जानें आज का पंचांग और महत्व

17 नवंबर 2025 को मार्गशीर्ष माह की कृष्ण त्रयोदशी पर सोम प्रदोष व्रत है. शिव-पार्वती की कृपा पाने के लिए इस व्रत का विशेष महत्व है. जानें आज का पंचांग, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि.

Aaj ka Panchang: आज यानी 17 नवंबर 2025 को मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि है. इस तिथि पर प्रदोष व्रत किया जाता है, जो सनातन धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है. धार्मिक मान्यता है कि प्रदोष व्रत करने से साधकों को शुभ फल की प्राप्ति होती है और सभी भय दूर होते हैं. चूंकि आज सोमवार है, इसलिए यह सोम प्रदोष व्रत कहलाता है. सोम प्रदोष व्रत भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा प्राप्त करने का विशेष अवसर माना जाता है.

आज का पंचांग

  • तिथि- कृष्ण त्रयोदशी (पूर्ण रात्रि)
  • मास- मार्गशीर्ष
  • दिन- सोमवार
  • संवत्- 2082
  • योग- प्रीति (प्रातः 07-23 तक)
  • करण- गरज (सायं 05-58 तक), वणिज (पूर्ण रात्रि)
  • सूर्योदय- 06-45 प्रातः
  • सूर्यास्त- 05-27 सायं
  • चंद्रोदय- 18 नवंबर, 04-56 प्रातः
  • चंद्रास्त- 03-32 दोपहर
  • सूर्य राशि- तुला
  • पक्ष- कृष्ण

शुभ और अशुभ समय

  • अभिजीत मुहूर्त- 11-45 से 12-27
  • अमृत काल- 09-52 रात से 11-39 रात
  • राहुकाल- 08-05 से 09-26 प्रातः
  • गुलिकाल- 01-26 से 02-46 दोपहर
  • यमगण्ड- 10-46 से 12-06 दोपहर

आज का नक्षत्र

आज चंद्रदेव चित्रा नक्षत्र में रहेंगे, जो 18 नवंबर सुबह 05-01 तक रहेगा. चित्रा नक्षत्र के जातक बुद्धिमान, दृढ़ इच्छाशक्ति वाले, व्यावहारिक और साहसी होते हैं. इनकी आकृति आकर्षक होती है और वस्त्रआभूषणों का शौक रहता है. इस नक्षत्र के स्वामी मंगल देव हैं और देवता त्वष्टा (सृष्टि के देवता) माने जाते हैं.

सोम प्रदोष व्रत का महत्व

सोमवार को आने वाला प्रदोष व्रत शिवपार्वती की कृपा प्राप्त करने के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है. सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में शिवपूजन करने से विशेष पुण्य मिलता है. श्रद्धा और संयम से व्रत करने पर मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं, स्वास्थ्य लाभ मिलता है और मानसिक शांति प्राप्त होती है. इस दिन “ॐ नमः शिवाय” का जप और महामृत्युंजय मंत्र का पाठ अत्यंत फलदायी माना गया है.

व्रत विधि

  • प्रातः स्नान कर शिवपार्वती का स्मरण करें.
  • व्रत का संकल्प लें और दिनभर सात्त्विकता बनाए रखें.
  • फलाहार या निर्जल व्रत करें (शक्ति अनुसार).
  • संध्या समय स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें.
  • प्रदोष काल में शिवलिंग पर जल, दूध, शहद, गंगाजल, दही आदि से अभिषेक करें.
  • बिल्वपत्र, धतूरा, चंदन और पुष्प अर्पित करें.
  • दीप जलाकर “ॐ नमः शिवाय” और “महामृत्युंजय मंत्र” का जप करें.
  • शिवपार्वती की आरती करें और प्रदोष व्रत कथा सुनें.
  • रात में प्रसाद ग्रहण कर व्रत का समापन करें.
  • अवसर हो तो दानपुण्य, गौसेवा और जरूरतमंदों की सहायता करें.

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कुल मिलाकर, आज का दिन शिवभक्ति और पुण्य प्राप्ति के लिए अत्यंत शुभ है. सोम प्रदोष व्रत से साधक को न केवल शिवपार्वती की कृपा मिलती है, बल्कि जीवन में शांति, स्वास्थ्य और समृद्धि भी आती है.

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-भारत एक्सप्रेस



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