Aaj Navratri Ka Kaun Sa Din Hai: शारदीय नवरात्रि की पूजा-पाठ और भक्ति का माहौल इन दिनों पूरे देश में छाया हुआ है. हर दिन मां दुर्गा के एक अलग स्वरूप की उपासना की जाती है. इस बार नवरात्रि 22 सितंबर से शुरू हुई है और 10 दिनों तक मनाई जा रही है क्योंकि तृतीया तिथि दो बार आई है. ऐसे में आज, 26 सितंबर 2025 को, नवरात्रि का चौथा दिन यानी चतुर्थी तिथि है. आज के दिन मां दुर्गा के चौथे रूप देवी कुष्मांडा की पूजा की जाती है.
कौन हैं मां कुष्मांडा?
मां कुष्मांडा को ब्रह्मांड की सृष्टि करने वाली देवी माना जाता है. ऐसी मान्यता है कि जब कुछ भी अस्तित्व में नहीं था, ना सूरज, ना चांद, ना दिन, ना रात तब मां कुष्मांडा ने अपनी मुस्कान से सूर्य की उत्पत्ति की और सृष्टि की रचना की. इसीलिए उन्हें ‘कूष्मांडा’ कहा जाता है ‘कूष्म’ यानी थोड़ा, और ‘अंड’ यानी ब्रह्मांड. वे सिंह पर सवार होती हैं और आठ भुजाओं में अलग-अलग अस्त्र-शस्त्र, कमंडल, जपमाला और अमृत कलश धारण करती हैं.
मां कुष्मांडा की पूजा विधि
सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और साफ-सुथरे वस्त्र पहनें. फिर घर के मंदिर या पूजा स्थल को साफ करके मां की चौकी सजाएं. पान, सुपारी, फल, फूल, लाल चुनरी, सिंदूर, रोली, अक्षत और चंदन जैसी पूजन सामग्री चढ़ाएं.
मां को मालपुआ, बताशा, केसर वाला पेठा या पीले रंग की मिठाई का भोग लगाएं. पूजा के दौरान घी का दीपक और धूपबत्ती जलाएं, दुर्गा सप्तशती या दुर्गा चालीसा का पाठ करें और अंत में मां की आरती गाएं.
क्यों है मां कुष्मांडा की पूजा विशेष?
ऐसा कहा जाता है कि मां कुष्मांडा की कृपा से व्यक्ति को बल, बुद्धि, स्वास्थ्य और समृद्धि मिलती है. खास तौर पर विद्यार्थियों के लिए यह दिन बेहद शुभ होता है. मां में सूर्य के समान तेज सहने की शक्ति है, इसलिए उनकी उपासना करने से जीवन में ऊर्जा और आत्मविश्वास बढ़ता है.
मां कुष्मांडा की कथा
पुराणों में बताया गया है कि मां कुष्मांडा ने ही अंधकार से भरे ब्रह्मांड को रोशनी दी थी. जब कोई जीवन नहीं था, तब उन्होंने अपने तेज और मुस्कान से सूर्य की रचना की और संसार को प्रकाशमान किया. इसलिए उन्हें जीवन की शुरुआत करने वाली देवी भी माना जाता है.
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मां कुष्मांडा की आरती
कूष्मांडा जय जग सुखदानी. मुझ पर दया करो महारानी॥
पिङ्गला ज्वालामुखी निराली. शाकम्बरी माँ भोली भाली॥
लाखों नाम निराले तेरे. भक्त कई मतवाले तेरे॥
भीमा पर्वत पर है डेरा. स्वीकारो प्रणाम ये मेरा॥
सबकी सुनती हो जगदम्बे. सुख पहुंचाती हो मां अम्बे॥
तेरे दर्शन का मैं प्यासा. पूर्ण कर दो मेरी आशा॥
मां के मन में ममता भारी. क्यों ना सुनेगी अरज हमारी॥
तेरे दर पर किया है डेरा. दूर करो मां संकट मेरा॥
मेरे कारज पूरे कर दो. मेरे तुम भंडारे भर दो॥
तेरा दास तुझे ही ध्याए. भक्त तेरे दर शीश झुकाए॥
कूष्मांडा जय जग सुखदानी. मुझ पर दया करो महारानी॥
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-भारत एक्सप्रेस
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