Hindu spiritual practices: हिंदू धर्म में मृत्यु के समय सोना, गंगाजल और तुलसी रखने की परंपरा आत्मा की शुद्धि और मोक्ष प्राप्ति से जुड़ी मानी जाती है. गरुड़ पुराण के अनुसार ये पवित्र वस्तुएं आत्मा को यमलोक के कष्टों से बचाने में सहायक होती हैं. इन्हें आत्मा की अंतिम यात्रा को शांत और दिव्य बनाने वाला माना गया है.
पवित्र वस्तुएं मोक्ष का मार्ग दिखाती हैं
सनातन धर्म में माना जाता है कि मनुष्य की आत्मा अमर है और शरीर छोड़ने के बाद वह एक नई यात्रा पर निकलती है. जन्म के साथ ही मृत्यु भी निश्चित मानी गई है, और इसी कारण अंतिम संस्कार को आत्मा की अंतिम गति का महत्वपूर्ण चरण माना जाता है. गरुड़ पुराण (Garuda purana) जैसे धार्मिक ग्रंथों में बताया गया है कि मृत्यु के समय कुछ पवित्र वस्तुएं आत्मा के लिए रक्षक और मार्गदर्शक का कार्य करती हैं.
सोना, गंगाजल आत्मा को शुद्ध करता है
इन मान्यताओं के अनुसार सोना एक अत्यंत पवित्र धातु है, जिसे अग्नि का प्रतीक माना जाता है. मृत्यु के समय मुख में सोना रखने से आत्मा को शुद्धि मिलती है और वह उच्च लोकों की ओर अग्रसर होती है. इसे अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने वाला माध्यम माना गया है.
इसी तरह गंगाजल को पापों से मुक्ति देने वाला अमृत कहा गया है. माना जाता है कि मृत्यु के समय इसे मुख में डालने से आत्मा जीवनभर के पापों से मुक्त होकर बिना कष्ट के शरीर छोड़ती है और उसे शांति प्राप्त होती है (soul and moksha concept).
तुलसी से वैकुंठ की प्राप्ति
तुलसी (Tulsi) को भगवान विष्णु की अत्यंत प्रिय और दिव्य शक्ति माना गया है. मान्यता है कि मृत्यु के समय मुख में तुलसी रखने से आत्मा को यमलोक के कष्टों से मुक्ति (Liberation from the sufferings of Yamlok) मिलती है और वह सीधे वैकुंठ की ओर अग्रसर होती है. यह सभी परंपराएं केवल धार्मिक आस्था ही नहीं, बल्कि परिवार के लिए मानसिक शांति और श्रद्धा का भी माध्यम हैं.
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-भारत एक्सप्रेस
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