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धनतेरस पर यम दीपदान से दूर होता है अकाल मृत्यु का भय: जानें घर की दक्षिण दिशा में ही क्यों जलाया जाता है 4 मुखी दीपक और क्या है सही विधि

Dhanteras Yamraj deepdan south direction diya vidhi: धनतेरस पर यमराज के लिए दीपदान से अकाल मृत्यु का भय टलता है. जानें घर की दक्षिण दिशा में चार मुखी आटे का दीपक जलाने की विधि, नियम और पौराणिक महत्व.

Dhanteras 2024 Kuber Kunji

धनतेरस पर कैसे करें कुबेर कुंजी की स्थापना.

पांच दिवसीय दीपोत्सव का महापर्व शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 को धनतेरस (धनत्रयोदशी) के साथ शुरू हो रहा है. धनतेरस का दिन जहां सोना, चांदी और घरेलू वस्तुओं की खरीदारी के लिए सर्वोत्तम अबूझ मुहूर्त माना जाता है, वहीं धार्मिक दृष्टि से इस दिन भगवान धन्वंतरि और मां लक्ष्मी की पूजा के साथ-साथ मृत्यु के देवता यमराज के निमित्त दीपदान करने की विशेष परंपरा है. मान्यता है कि धनतेरस और रूप चतुर्दशी की शाम यमराज के लिए दीपदान करने से परिवार से अकाल मृत्यु का भय हमेशा के लिए समाप्त हो जाता है.

पौराणिक शास्त्रों में यम दीपदान का महत्व

स्कंद पुराण और पद्म पुराण में धनतेरस की शाम यमराज के निमित्त दीपदान का स्पष्ट उल्लेख मिलता है:

“कार्तिकस्यासिते पक्षे त्रयोदश्यां निशामुखे. यमदीपं बहिर्दद्यादपमृत्युर्विनश्यति॥”

उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार, कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी की शाम (प्रदोष काल) में घर के बाहर यमदेव के लिए दीपक प्रज्वलित करने से अपमृत्यु यानी असमय मौत का संकट टल जाता है. यमराज प्रसन्न होकर परिवार को सुख, शांति, आरोग्य और दीर्घायु का वरदान देते हैं.

Yam Deep Daan on Dhanteras

दक्षिण दिशा में ही क्यों रखा जाता है यम का दीपक?

शास्त्रों और वास्तु के अनुसार दक्षिण दिशा को यमराज और पितरों की दिशा माना गया है. इसी कारण सूर्यास्त के बाद यमराज के निमित्त जलाया जाने वाला दीपक घर के मुख्य द्वार पर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके रखा जाता है. मान्यता है कि इस दिशा में दीपक प्रज्वलित करने से घर में किसी भी प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा और आकस्मिक संकट का प्रवेश नहीं होता है.

यम दीपदान की संपूर्ण एवं सरल विधि

आटे का दीपक तैयार करें: सूर्यास्त के ठीक बाद गेहूं के आटे को गूंथकर एक बड़ा चौमुखी दीपक बनाएं.

चार मुखी बत्ती लगाएं: रुई की दो लंबी बत्तियां बनाकर उन्हें दीपक में क्रॉस (Cross) के रूप में रखें, जिससे दीपक के चारों कोनों पर चार मुख दिखाई दें.

तिल का तेल और पूजन: दीपक में तिल का तेल (या सरसों का तेल) डालें और उसमें कुछ काले तिल अवश्य डालें. इसके बाद रोली, अक्षत (चावल) और पुष्प से दीपक का विधिवत पूजन करें.

मुख्य द्वार पर स्थापना: घर के मुख्य दरवाजे के बाहर जमीन पर थोड़ी सी खील या साबुत गेहूं की ढेरी बनाएं और उसी के ऊपर यह दीपक रखें.

दक्षिण दिशा की ओर मुख: जलते हुए दीपक का मुख दक्षिण दिशा की तरफ रखें. दीपक रखते समय यमराज का ध्यान करें, हाथ जोड़कर प्रणाम करें और परिवार की सुरक्षा व लंबी उम्र की प्रार्थना करें.

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