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दीपक जलाते समय बोलें बस यह एक चमत्कारी मंत्र! आरोग्य और धन-संपदा से भर जाएगी तिजोरी, दूर होगा हर अंधकार

Diwali 2026 Puja Diya Rules: 8 नवंबर को मनाए जाने वाले दीपोत्सव पर लक्ष्मी पूजन के दौरान दीपक जलाने की सही दिशा, खंडित दीयों से बचने के नियम और अचानक दीपक बुझने पर किए जाने वाले शास्त्रीय उपाय जानें.

Diwali 2026 Puja Diya Rules

Diwali 2026 Puja Diya Rules

Diwali 2026 Puja Diya Rules: प्रकाश और उल्लास का महापर्व दीपावली इस वर्ष 8 नवंबर (रविवार) को मनाया जाएगा. शास्त्रों के अनुसार, दीपकों की ज्योति देवी-देवताओं को अत्यंत प्रिय है. दीपक अज्ञान रूपी अंधकार को मिटाकर जीवन में विवेक और ज्ञान के प्रकाश का संचार करता है. जब घर-आंगन में दीपक प्रज्वलित किए जाते हैं, तो न केवल नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है, बल्कि मन-मस्तिष्क में पवित्र भावों और समृद्धि का वास होता है.

दीपावली की मुख्य पूजा में दीपक प्रज्वलित करते समय शास्त्रों में कुछ विशेष नियमों और सावधानियों का उल्लेख किया गया है, जिनका पालन करने से पूजा का पूर्ण फल प्राप्त होता है.

दीपक जलाते समय जरूर करें इस कल्याणकारी मंत्र का जप

दीपक प्रज्वलित करते समय इस पारंपरिक मंत्र का उच्चारण करना चाहिए:

शुभं करोति कल्याणमारोग्यं धनसंपदा।

शत्रुबुद्धिविनाशाय दीपज्योतिर्नमोस्तुते।।

भावार्थ: हे दीपज्योति! आप हमारा कल्याण करें, हमें उत्तम स्वास्थ्य (आरोग्य) और धन-संपत्ति प्रदान करें. हमारे भीतर और बाहर के शत्रुओं (विकारों) की मति का नाश करें. जगत का कल्याण करने वाली इस पावन दिव्य ज्योति को मैं बारंबार नमन करता हूं.

पूजा के दौरान अचानक दीपक बुझ जाए, तो क्या करें?

लक्ष्मी पूजन करते समय यह विशेष ध्यान रखना चाहिए कि दीपक मध्य पूजा में बुझे नहीं. इसके लिए पहले से ही दीपक में पर्याप्त घी या तेल डालना चाहिए और बाती को अच्छी तरह व्यवस्थित रखना चाहिए. यदि हवा के झोंके या किसी अन्य कारण से पूजा का दीपक अचानक बुझ जाता है, तो मन में किसी प्रकार का भय या अमंगल की शंका न लाएं. ऐसी स्थिति में:

हाथ जोड़कर भगवान से अपनी भूल या अनजाने में हुई त्रुटि के लिए क्षमा याचना करें.

इसके तुरंत बाद दीपक को शुद्ध भाव से पुनः प्रज्वलित कर दें.

ईश्वर भाव के भूखे हैं; सच्ची श्रद्धा और क्षमा प्रार्थना से किसी भी प्रकार का दोष समाप्त हो जाता है.

घी और तेल का दीपक: कौन सा किस हाथ की ओर रखें?

दीपक स्थापित करते समय दिशा और स्थिति का ध्यान रखना बेहद महत्वपूर्ण माना गया है:

घी का दीपक: देवी-देवताओं की पूजा में गाय के घी का दीपक जलाना सर्वश्रेष्ठ माना जाता है. इसे हमेशा साधक (पूजा करने वाले) के बाएं हाथ (Left Hand) की ओर रखना चाहिए.

तेल का दीपक: यदि आप तिल या सरसों के तेल का दीपक जला रहे हैं, तो उसे पूजा करते समय अपने दाएं हाथ (Right Hand) की ओर स्थापित करें.

बत्ती का चयन: दीपक में सामान्यतः सफेद रुई की बत्ती (फूल या लंबी बाती) लगानी चाहिए. रुई उपलब्ध न होने पर कलावा (लाल रक्षासूत्र) की बत्ती बनाकर भी जलाई जा सकती है.

खंडित दीपक का इस्तेमाल क्यों न करें?

पूजा-पाठ में इस्तेमाल होने वाले मिट्टी या धातु के दीपक का पूर्ण और अखंडित होना अनिवार्य है.

एकाग्रता में व्यवधान: शास्त्रों के अनुसार, चटके या टूटे हुए (खंडित) दीपक से पूजा का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता. खंडित चीजों से पूजा करते समय मन में शंका पैदा होती है और साधक का ध्यान भगवान से भटककर टूटी हुई वस्तु पर चला जाता है.

अशुभता से बचाव: हमेशा नए, साफ और अक्षत मिट्टी के दीयों का ही लक्ष्मी पूजन में उपयोग करें.

गाय के घी का महत्व

पंचामृत में शामिल गाय का घी जब अग्नि के संपर्क में आता है, तो वातावरण को शुद्ध और रोगाणुमुक्त बनाता है. वास्तु शास्त्र के मुताबिक, गाय के घी के दीपक से निकलने वाला धुआं घर के वास्तु दोषों और नकारात्मकता को दूर कर सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है. यदि गाय का शुद्ध घी उपलब्ध न हो, तो तिल का तेल श्रेष्ठ विकल्प माना जाता है.

दीयों के शास्त्रीय नियम: एक नजर में

नियम / विषय शास्त्र सम्मत विधान

घी का दीपक
साधक के बाएं हाथ की तरफ रखें.

तेल का दीपक
साधक के दाएं हाथ की तरफ रखें.

दीपक बुझने पर
मन में शंका न रखें; क्षमा याचना कर पुनः प्रज्वलित करें.

दीपक का स्वरूप
पूर्ण व अखंडित होना चाहिए; चटके दीये वर्जित हैं.

बत्ती का प्रकार
शुद्ध सफेद रुई अथवा लाल रक्षासूत्र (कलावा) की बत्ती.

भारत एक्सप्रेस



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