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शंकराचार्य ने 25 आदिवासियों की कराई घर वापसी, गंगाजल और मंत्रोच्चार के साथ अपनाया सनातन धर्म

Sanatan Dharma news: गुजरात के छोटा उदेपुर में आयोजित कार्यक्रम में 25 आदिवासी-वनवासी लोगों ने स्वेच्छा से सनातन धर्म अपनाने का संकल्प लिया. कार्यक्रम में शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती मौजूद रहे.

Shankaracharya Swami Sadanand Saraswati

Sanatan Dharma: गुजरात के छोटा उदेपुर जिले के वासणा (कोषिन्द्रा) गांव में रविवार को आयोजित एक धार्मिक कार्यक्रम के दौरान 25 आदिवासी और वनवासी भाई-बहनों ने स्वेच्छा से सनातन हिंदू धर्म अपनाने का संकल्प लिया. यह कार्यक्रम द्वारका शारदापीठ द्वारा संचालित नवस्थापित श्री आनंद वर्धन आश्रम के उद्घाटन समारोह के अवसर पर आयोजित किया गया, जिसमें द्वारकाशारदापीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती (Shankaracharya Swami Sadanand Saraswati) मुख्य रूप से उपस्थित रहे.

उद्घाटन के साथ हुआ धार्मिक संकल्प

कार्यक्रम की शुरुआत नव निर्मित श्री आनंद वर्धन आश्रम के उद्घाटन से हुई. आश्रम का शुभारंभ शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती ने अपने करकमलों से किया. इसके बाद आयोजित धार्मिक अनुष्ठान में 25 लोगों ने गंगाजल ग्रहण किया और भगवान श्रीराम का मंत्र लेकर स्वयं को सनातन हिंदू परंपरा से जोड़ने का संकल्प व्यक्त किया.

इस दौरान सभी ने यह भी कहा कि वे स्वयं को हिंदू मानते हैं, आगे भी हिंदू रहेंगे और जीवनभर हिंदू धर्म की परंपराओं तथा मान्यताओं का पालन करेंगे. आयोजकों के अनुसार यह निर्णय सभी लोगों ने अपनी इच्छा से लिया.

वर्षों से चल रहा है स्वधर्मानयन

सभा को संबोधित करते हुए शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती ने कहा कि वे पिछले कई वर्षों से गुजरात के आदिवासी और वनवासी क्षेत्रों में लगातार भ्रमण कर रहे हैं. उनके अनुसार इस अभियान का उद्देश्य लोगों को अपने धार्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति जागरूक करना है.

उन्होंने कहा कि वासणा गांव में श्री आनंद वर्धन आश्रम की स्थापना उनके स्वधर्मानयन अभियान को नई मजबूती देगी. अब इस आश्रम के माध्यम से आसपास के गांवों तक पहुंचना आसान होगा और अधिक लोगों से संवाद स्थापित किया जा सकेगा.

गांव-गांव जाकर करेंगे जागरूकता अभियान

शंकराचार्य ने अपने संबोधन में कहा कि आने वाले समय में वे गांव-गांव जाकर लोगों से संवाद करेंगे. उनका कहना था कि आदिवासी और वनवासी समाज को यह समझाया जाएगा कि उन्हें अपने पारंपरिक धर्म और संस्कृति का संरक्षण क्यों करना चाहिए. साथ ही धार्मिक जीवन, परंपराओं और आचरण के बारे में भी उन्हें मार्गदर्शन दिया जाएगा. उन्होंने आशा जताई कि आश्रम केवल धार्मिक गतिविधियों का केंद्र नहीं रहेगा, बल्कि समाज में सांस्कृतिक जागरूकता बढ़ाने और लोगों को अपने मूल्यों से जोड़ने का भी माध्यम बनेगा.


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धर्मांतरण से चर्चा में आया कार्यक्रम

देश में समय-समय पर धर्मांतरण और ‘घर वापसी’ जैसे मुद्दों पर चर्चा होती रही है. ऐसे माहौल में छोटा उदेपुर में आयोजित यह कार्यक्रम भी लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहा है. कार्यक्रम में शामिल 25 लोगों के सनातन धर्म अपनाने की घटना को आयोजकों ने ‘घर वापसी’ बताया और कहा कि यह पूरी प्रक्रिया स्वेच्छा से संपन्न हुई.

इस आयोजन के साथ श्री आनंद वर्धन आश्रम की औपचारिक शुरुआत भी हो गई है. आयोजकों का मानना है कि आने वाले समय में यह आश्रम आदिवासी और वनवासी क्षेत्रों में धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बनेगा.

-भारत एक्सप्रेस



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