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125 साल पुराना इंदौर का बड़ा गणेश मंदिर, 25 फीट की प्रतिमा में नहीं लगा सीमेंट; चूना, गुड़ और अष्टधातु से हुआ निर्माण

Bada Ganpati Indore: मध्य प्रदेश के इंदौर में भगवान गणेश का एक ऐसा मंदिर है, जहां स्थापित विशाल प्रतिमा अपनी भव्यता के साथ-साथ निर्माण की अनोखी शैली के लिए भी जानी जाती है. मल्हारगंज स्थित बड़ा गणपति मंदिर में भगवान गणेश की करीब 25 फीट ऊंची और लगभग 15 फीट चौड़ी प्रतिमा स्थापित है.

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मल्हारगंज स्थित बड़ा गणपति मंदिर में भगवान गणेश की करीब 25 फीट ऊंची और लगभग 15 फीट चौड़ी प्रतिमा स्थापित है.

Bada Ganpati Indore: मध्य प्रदेश के इंदौर में भगवान गणेश का एक ऐसा मंदिर है, जहां स्थापित विशाल प्रतिमा अपनी भव्यता के साथ-साथ निर्माण की अनोखी शैली के लिए भी जानी जाती है. मल्हारगंज स्थित बड़ा गणपति मंदिर में भगवान गणेश की करीब 25 फीट ऊंची और लगभग 15 फीट चौड़ी प्रतिमा स्थापित है. दावा किया जाता है कि प्रतिमा के निर्माण में सीमेंट का इस्तेमाल नहीं किया गया है.

बड़ा गणपति चौराहे पर स्थित यह मंदिर करीब 125 साल पुराना है. गणेश चतुर्थी के मौके पर यहां भक्तों की संख्या और बढ़ गई है. इंदौर के अलावा आसपास के इलाकों और दूसरे राज्यों से भी श्रद्धालु भगवान गणेश के दर्शन करने मंदिर पहुंच रहे हैं.

मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं में भगवान गणेश के प्रति गहरी आस्था देखने को मिलती है. जबलपुर से दर्शन करने पहुंचीं अंजू वर्मा का कहना है कि बड़े गणपति के दरबार में आने वाले भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं और उन्हें सुख-शांति का अनुभव मिलता है.

गणपति ने जीवन बदल दिया- श्रद्धालु

वहीं सालों से मंदिर में दर्शन करने आ रहीं श्रद्धालु कविता चौहान का कहना है कि बड़े गणपति ने उनके जीवन में बहुत कुछ दिया है. उन्होंने कहा कि यहां आने वाला कोई भी भक्त खाली हाथ नहीं लौटता.

मंदिर के पुजारी सचिन दाधीच के मुताबिक बड़े गणपति मंदिर की स्थापना वर्ष 1901 में हुई थी. तभी से इस मंदिर की अपनी अलग धार्मिक मान्यता रही है. पुजारी के मुताबिक इस मुद्रा में स्थापित यह एशिया की सबसे बड़ी भगवान गणेश की प्रतिमाओं में शामिल है.

चूना-गुड़ सहित अष्टधातु से बनी है प्रतिमा

प्रतिमा की सबसे खास बात इसके निर्माण में इस्तेमाल की गई सामग्री बताई जाती है. मंदिर प्रबंधन के अनुसार, इसे बनाने में सीमेंट का इस्तेमाल नहीं किया गया. इसके निर्माण में चूना, गुड़, मैथीदाना, पवित्र नदियों का जल और अष्टधातु जैसी सामग्री का इस्तेमाल किया गया है. यही वजह है कि यह प्रतिमा श्रद्धालुओं के साथ-साथ लोगों के बीच कौतूहल का विषय भी बनी हुई है.

 

 

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मंदिर में पूरे साल भक्तों का आना-जाना लगा रहता है, लेकिन गणेश चतुर्थी से लेकर अनंत चतुर्दशी तक यहां विशेष भीड़ रहती है. इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान गणेश के दर्शन करने पहुंचते हैं. कोई अपनी मनोकामना लेकर आता है तो कोई मनोकामना पूरी होने के बाद भगवान गणेश का आभार जताने के लिए यहां पहुंचता है.

-भारत एक्सप्रेस



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