अभी कार्तिक मास चल रहा है और इस दौरान घरों में रोज़ दीपक जलाने की परंपरा निभाई जा रही है. इसी महीने में दीपावली (20 अक्टूबर) को मनाई जा रही है. धार्मिक मान्यता है कि दीपक की रोशनी देवी-देवताओं को अत्यंत प्रिय होती है और यह अंधकार दूर कर सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है. जीवन और ज्ञान के दृष्टिकोण से दीपक का अर्थ है कि ज्ञान का प्रकाश अज्ञान और अंधकार को दूर करता है.
विशेषज्ञों के अनुसार पूजा-पाठ में खंडित दीपक का उपयोग नहीं करना चाहिए. मिट्टी के दीपक भले ही पारंपरिक और लोकप्रिय हैं, लेकिन ये आसानी से टूट जाते हैं. पूजा में टूटा या खंडित दीपक जलाना अशुभ माना जाता है और इससे पूजा का पूरा फल प्राप्त नहीं होता. खंडित वस्तुओं का उपयोग हमारी पूजा में एकाग्रता को भी भंग कर देता है.
घर और जीवन में शुभ का प्रतीक
दीपक के महत्व को देखते हुए इसे शुभता, समृद्धि और पवित्रता का प्रतीक माना जाता है. दीपक अज्ञान के अंधकार को दूर कर ज्ञान का प्रकाश फैलाता है. जब हम दीपक जलाते हैं तो न केवल घर की अंधकारमय जगहें रोशन होती हैं, बल्कि हमारे मन में भी सकारात्मक ऊर्जा और पवित्र भावों का संचार होता है.
पौराणिक मान्यता के अनुसार पूजा में दीपक जलाने के लिए गाय के दूध से बने घी का प्रयोग श्रेष्ठ होता है. घी का दीपक न केवल वातावरण को शुद्ध करता है, बल्कि इसकी ज्वाला से सूक्ष्म कीटाणु नष्ट होकर घर का माहौल पवित्र और सकारात्मक बनता है. दीपक जलाने की दिशा और विधि भी महत्वपूर्ण मानी जाती है.
पूजा में घी का दीपक बाएं हाथ की ओर और तेल का दीपक दाएं हाथ की ओर रखना चाहिए. पूजा के दौरान दीपक का बुझना अपशकुन माना जाता है. यदि दीपक अचानक बुझ जाए तो भगवान से क्षमा याचना कर इसे फिर से जलाना चाहिए. दीपक जलाने के लिए सामान्यतः सफेद रुई की बत्ती का उपयोग किया जाता है. रुई न होने पर लाल धागे की बत्ती भी प्रयोग की जा सकती है, क्योंकि लाल रंग शक्ति और मंगल का प्रतीक है.
इस कार्तिक मास और दीपावली पर दीपक जलाकर न केवल घर का माहौल रोशन करें, बल्कि अपने जीवन में भी सकारात्मक ऊर्जा और पवित्रता का संचार करें.
ये भी पढ़ें- BJP ने बिहार विधानसभा चुनाव के लिए जारी की दूसरी लिस्ट, मैथिली ठाकूर को मिला टिकट
Also Follow Bharat Express on Youtube
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.



