Karwa Chauth Moon Time Today: आज पूरे देश में सुहागिन महिलाएं करवा चौथ का व्रत रख रही हैं. यह पर्व पति-पत्नी के प्रेम, समर्पण और अटूट रिश्तों का प्रतीक माना जाता है. हिंदू पंचांग के अनुसार, करवा चौथ कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है. इस दिन महिलाएं सुबह से लेकर रात तक निर्जला व्रत रखती हैं, ताकि अपने पति की लंबी आयु और सुख-समृद्धि की कामना कर सकें.
करवा चौथ का व्रत भारत में सबसे कठिन व्रतों में से एक माना जाता है. इस दौरान सुहागिन महिलाएं पूरे दिन बिना कुछ खाए-पिए उपवास रखती हैं और 16 श्रृंगार करके पूजा-अर्चना करती हैं. व्रत के दौरान शाम के समय भगवान शिव, माता पार्वती और करवा माता की पूजा-अर्चना का विशेष महत्व होता है.
चंद्रमा उदय का समय और महत्व
आज 10 अक्टूबर 2025 को करवा चौथ की चतुर्थी तिथि सुबह 6:19 मिनट से शुरू होकर शाम 8:13 मिनट तक रहेगी. इस व्रत की कुल अवधि लगभग 13 घंटे 54 मिनट है. शाम का मुख्य पूजन 5:57 मिनट से 7:11 मिनट तक संपन्न होगा, जिसकी अवधि 1 घंटे 14 मिनट है. करवा चौथ व्रत का सबसे अहम हिस्सा है चंद्रमा का दर्शन और व्रत का पारण. इस साल चंद्रोदय का समय शाम 8:13 मिनट निर्धारित किया गया है.
हालांकि, देश के अलग-अलग शहरों में चंद्रमा के निकलने का समय कुछ मिनटों में भिन्न हो सकता है. व्रत पूरा करने के लिए महिलाएं चंद्रमा के दर्शन के बाद जल अर्पित करती हैं और अपने पति के हाथ से पानी पीकर व्रत खोलती हैं.
हिंदू धर्म में यह दिन केवल व्रत रखने तक सीमित नहीं है. यह पति-पत्नी के बीच प्रेम और विश्वास को मजबूत करने का अवसर भी है. सुहागिन महिलाएं पूरे दिन घर के वातावरण को साफ-सुथरा रखती हैं और विशेष पकवान तैयार करती हैं, ताकि परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहे.
संयम और ध्यान से मिलती है सकारात्मक ऊर्जा
विशेषज्ञों के अनुसार, करवा चौथ का व्रत केवल परंपरा नहीं बल्कि सामाजिक और मानसिक संतुलन के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है. व्रत के दौरान महिलाएं संयमित रहती हैं, दिनभर पूजा और ध्यान करती हैं, जिससे मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है. आज के दिन भारत के अलग-अलग शहरों में चंद्रमा निकलने का समय अलग-अलग हो सकता है, इसलिए महिलाएं स्थानीय पंचांग के अनुसार चांद के दर्शन करें. करवा चौथ का यह पर्व पूरे देश में भक्ति और प्रेम का प्रतीक बनकर हर साल मनाया जाता है.
इस तरह, करवा चौथ 2025 का यह व्रत ना केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि पति-पत्नी के बीच प्रेम और विश्वास को मजबूत करने का भी अवसर है.
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– भारत एक्सप्रेस
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