Khatu Shyam Ji Sikar: सीकर/राहुल टांक: राजस्थान के सीकर जिले में स्थित विश्व प्रसिद्ध बाबा खाटू श्याम (Khatu Shyam Ji) की महिमा बिल्कुल निराली है. ‘हारे के सहारे’ कहे जाने वाले बाबा श्याम के दरबार में हर साल लाखों भक्त अपनी आस्था और मन्नत लेकर पहुंचते हैं. कोई पैदल आता है, कोई दंडवत करता है, तो कोई कठिन व्रत रखता है. लेकिन इस बार खाटू श्याम के दरबार में भक्ति का एक ऐसा अनोखा रूप देखने को मिला, जिसने सबको अचरज में डाल दिया. उत्तर प्रदेश के रहने वाले कन्हैया लाल अपनी पूरी यात्रा स्केटिंग करते हुए तय करके बाबा के चरणों में पहुंचे हैं.
1 अप्रैल को शुरू किया सफर (Baba Khatu Shyam Nishan Yatra)
कन्हैया लाल ने अपनी यह अनोखी यात्रा 1 अप्रैल को उत्तर प्रदेश से शुरू की थी और पूरे रास्ते स्केटिंग करते हुए ही वे सीकर तक आए. कन्हैया ने बताया कि उन्हें स्केटिंग करते हुए लगभग 7 साल हो चुके हैं. अपने इस हुनर को वे पहले भी धर्म के मार्ग पर इस्तेमाल कर चुके हैं.
इससे पहले वे करीब 100 किलोमीटर तक की कांवड़ यात्रा भी स्केटिंग के जरिए पूरी कर चुके हैं. लेकिन, खाटू श्याम बाबा की यह यात्रा उनके जीवन की सबसे खास और लंबी यात्रा रही. उनके मन में अचानक विचार आया कि क्यों न स्केटिंग करते हुए बाबा के दरबार जाया जाए, और बिना देर किए उन्होंने इस संकल्प को हकीकत में बदल दिया.
नास्तिक से आस्तिक बनने की कहानी (Khatu Shaym Bhakht Kanhaiya Lal skater)
इस पूरी यात्रा की सबसे दिलचस्प बात यह है कि कन्हैया लाल पहले भगवान में ज्यादा विश्वास नहीं रखते थे. उनके मन में हमेशा एक तरह की बेचैनी, घबराहट और संदेह बना रहता था. यह बदलाव तब आया जब उन्होंने सोशल मीडिया पर अपने स्केटिंग के वीडियो साझा किए. उनके फॉलोअर्स और अन्य लोगों ने उन्हें खाटू श्याम बाबा के दरबार जाने की सलाह दी. लोगों के अनुभव और बाबा की अपार महिमा सुनकर उनके मन में भी श्रद्धा जाग उठी. कन्हैया को ऐसा लगा जैसे स्वयं बाबा का बुलावा आ गया हो, और उनके कदम खुद-ब-खुद खाटू धाम की ओर बढ़ते चले गए.
राजस्थानी लोगों ने जीता दिल (Skating to Khatu Shyam)
कन्हैया लाल ने बताया कि इस लंबी और कठिन यात्रा के दौरान उन्हें कई तरह की शारीरिक और मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ा. लेकिन चमत्कारिक रूप से हर बार समाधान अपने आप मिलता गया. उन्होंने विशेष रूप से राजस्थान के लोगों का आभार जताया. कन्हैया ने कहा कि यहां के लोगों ने उन्हें भरपूर सहयोग और स्नेह दिया. उनके मुताबिक, “राजस्थान के लोग सनातन धर्म का बहुत सम्मान करते हैं और यात्रियों की मदद के लिए हमेशा दिल खोलकर तैयार रहते हैं.”
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मंजिल पर पहुंचने के बाद जब कन्हैया लाल ने बाबा श्याम को अपना ‘निशान’ अर्पित किया और उनके दर्शन किए, तो उनके मन की सारी बेचैनी और घबराहट एक पल में गायब हो गई. उन्होंने एक अलग ही सुकून और शांति का अनुभव किया. अपनी इस यात्रा को जीवन का सबसे बड़ा चमत्कार बताते हुए कन्हैया लाल ने कहा, “जो व्यक्ति पहले भगवान में विश्वास नहीं करता था, वह आज इतनी गहरी श्रद्धा के साथ बाबा के दरबार तक पहुंच गया है. जब सच्चे मन से बाबा को पुकारा जाता है, तो रास्ते अपने आप बन जाते हैं.”
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