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मालाड में ट्रेन में सवार हुए बप्पा, लूडो खेलते दिखे मूषक; जानिए कोंकण कन्या एक्सप्रेस थीम वाले पंडाल की खासियत

Malad Ganpati Pandal: मुंबई के मालाड में शिव कृपा मित्र मंडल ने ‘कोंकण कन्या एक्सप्रेस’ ट्रेन की अनोखी थीम पर भव्य गणपति पंडाल तैयार किया है. पंडाल में भगवान शिव, माता पार्वती और बाल गणेश ट्रेन की सीट पर सह-यात्री के रूप में विराजमान हैं, वहीं मूषक लूडो खेलते और अखबार पढ़ते नजर आ रहे हैं.

Malad Ganpati Pandal Konkan Kanya Express Theme

Malad Ganpati Pandal Konkan Kanya Express Theme

Malad Ganpati Pandal: महाराष्ट्र में गणेशोत्सव की धूम मची हुई है और सपनों के शहर मुंबई में जगह-जगह एक से बढ़कर एक भव्य व अनूठे गणपति पंडाल सजाए गए हैं. हर साल पंडाल आयोजक नई और अनोखी थीम के जरिए बप्पा के भक्तों को आकर्षित करने का प्रयास करते हैं. इसी कड़ी में इस बार मुंबई के मालाड इलाके में स्थित शिव कृपा मित्र मंडल का गणपति पंडाल पूरे शहर में चर्चा और कौतूहल का केंद्र बना हुआ है. मंडल ने इस बार पंडाल को गांव की ओर जाने वाली भारतीय रेलवे की ट्रेन की थीम पर तैयार किया है, जिसे देखने के लिए भक्तों का जनसैलाब उमड़ रहा है.

कोंकण कन्या एक्सप्रेस का सजीव अनुभव

शिव कृपा मित्र मंडल द्वारा तैयार किए गए इस पंडाल को बाहर और अंदर दोनों तरफ से ट्रेन के डिब्बों का रूप दिया गया है. पंडाल में कदम रखते ही श्रद्धालुओं को ऐसा महसूस होता है मानो वे सचमुच किसी ट्रेन स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर खड़े हैं और ट्रेन में सफर करने जा रहे हैं. इसमें विशेष रूप से मुंबई से कोंकण जाने वाली प्रसिद्ध ‘कोंकण कन्या एक्सप्रेस’ की झलक देखने को मिलती है. ट्रेन के डिब्बे, बोगियों के दरवाजे, खिड़कियाँ, सीटें और यात्रियों के सामान की व्यवस्था को इतनी बारीकी से डिजाइन किया गया है कि लोग इसकी कारीगरी की जमकर तारीफ कर रहे हैं.

ट्रेन की सीट पर विराजमान हैं भगवान शिव, माता पार्वती और बाल गणेश

इस पंडाल का सबसे खूबसूरत और आकर्षित करने वाला पहलू यह है कि इसमें भगवान को आम इंसानों और यात्रियों के बीच सह-यात्री (Co-passengers) के रूप में दिखाया गया है. पंडाल के भीतर ट्रेन की एक सीट पर भगवान शिव, माता पार्वती और बाल गणेश को बहुत ही शांत और मनमोहक अंदाज़ में बैठे हुए दिखाया गया है. जिस तरह आम लोग ट्रेन की खिड़की के पास बैठकर सफर का आनंद लेते हैं, ठीक उसी रूप में देव परिवार को यहाँ ट्रेन की सीट पर विराजमान किया गया है. यह दृश्य भगवान और उनके भक्तों के बीच के रिश्ते को बेहद सहज और आत्मीय बनाता है.

मूषकों की टोली: कोई खेल रहा लूडो तो कोई पढ़ रहा अखबार

केवल बप्पा ही नहीं, बल्कि उनके प्रिय वाहन मूषक (चूहों) की टोली को भी पूरी तरह से आम यात्रियों के रंग में रंगा गया है. लंबे रेल सफर के दौरान समय बिताने के लिए यात्री जो-जो गतिविधियां करते हैं, वही सब करते हुए इन मूषकों को दर्शाया गया है.
ट्रेन की बर्थ पर मूषकों की एक टोली आपस में बड़े चाव से लूडो और ताश खेलती हुई दिखाई गई है. कुछ मूषक सफर के दौरान देश-दुनिया की खबर रखने के लिए अखबार और पत्रिकाएं पढ़ते नजर आ रहे हैं. कुछ मूषक आम यात्रियों की तरह एक-दूसरे से बातें करते और विंडो सीट से बाहर का नजारा देखते प्रतीत होते हैं. मूषकों के इन मनोरंजक दृश्यों को देखकर बच्चे और बड़े सभी खिलखिला उठते हैं.

गांव जाने वाले सफर की यादें हुईं ताजा

मुंबई में रहने वाले लाखों लोग त्योहारों के समय अपने-अपने गांव जाने के लिए ट्रेनों में सफर करते हैं. मुंबई से गांव जाने वाली ट्रेनों का माहौल अपने आप में बहुत खास, खुशनुमा और उत्साह से भरा होता है. शिव कृपा मित्र मंडल ने इसी भावना और यादों को पंडाल में साकार करने की कोशिश की है. यह पंडाल हर उस व्यक्ति के दिल को छू रहा है जिसने कभी मुंबई से अपने गांव जाने के लिए ट्रेन का सफर किया है.

भगवान को आम जनजीवन से जोड़ने की अनूठी कोशिश

इस अनोखी थीम के पीछे का मुख्य उद्देश्य भगवान को आम इंसान की रोजाना की जिंदगी और भावनाओं से जोड़ना है. जिस ट्रेन में बैठकर एक आम आदमी अपने परिवार और अपनों से मिलने की खुशी लेकर गांव जाता है, उसी सफर में बप्पा को साथी बनाकर यह संदेश दिया गया है कि ईश्वर हर कदम पर हमारे साथ हैं. यही कारण है कि मालाड के इस पंडाल को देखने के लिए केवल स्थानीय लोग ही नहीं, बल्कि मुंबई और आसपास के दूर-दराज के इलाकों से भी भारी संख्या में श्रद्धालु पहुँच रहे हैं. लोग न केवल बप्पा के दर्शन कर उनका आशीर्वाद ले रहे हैं, बल्कि इस अनोखे ट्रेन वाले पंडाल और मूषकों की हरकतों को अपने मोबाइल कैमरों और रील्स में कैद कर सोशल मीडिया पर शेयर कर रहे हैं.

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