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कांवरिया पथ पर आस्था का अनोखा रंग: पूरे शरीर पर लोहे की जंजीरें लपेटकर देवघर चला शिवभक्त

बिहार के मुंगेर में सुल्तानगंज-देवघर कांवरिया पथ पर सेना के रिटायर्ड हवलदार रामउदय सिंह की अनोखी भक्ति चर्चा का विषय बनी हुई है. वे समाज में बढ़ती अप्रिय घटनाओं और युवाओं की असमय मौतों के प्रति पीड़ा जताने के लिए पूरे शरीर पर लोहे की जंजीरें लपेटकर 105 किमी की पैदल यात्रा पर निकले हैं.

Munger Ex-Army Man Walks To Deoghar Wrapped In Iron Chains For World Peace

Munger Shivbhakt Ex Army Man: सुमित कुमार/मुंगेर: विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेला शुरू होने में अभी करीब दो महीने का वक्त बचा है, लेकिन सुल्तानगंज से देवघर जाने वाले कच्चे कांवरिया पथ पर आस्था का एक ऐसा अनूठा रंग देखने को मिल रहा है जिसे देखकर हर कोई दंग है. सुल्तानगंज से उत्तरवाहिनी गंगा का पवित्र जल लेकर देवघर (बाबा बैद्यनाथ धाम) की ओर बढ़ रहे एक शिवभक्त इन दिनों श्रद्धालुओं और राहगीरों के बीच भारी आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं. हम बात कर रहे हैं शेखपुरा जिले के एकड़ा गांव के रहने वाले रामउदय सिंह की, जो भारतीय सेना से सेवानिवृत्त (रिटायर्ड) हवलदार हैं. रामउदय सिंह पूरे शरीर पर लोहे की भारी-भरकम जंजीरें लपेटकर और एक कैदी का रूप धारण कर बाबा धाम की 105 किलोमीटर की कठिन पैदल यात्रा पर निकले हैं.

सेना से रिटायर और अनोखा संकल्प

सफर के दौरान मिल्की के पास जब कांवरिया पथ पर लोगों ने जंजीरों में बंधे इस फौजी को देखा, तो उनके साथ तस्वीरें खिंचवाने और उनकी इस कठिन साधना को जानने के लिए भारी भीड़ उमड़ पड़ी. रामउदय सिंह ने बताया कि साल 2023 में सेना से रिटायर होने के बाद उन्होंने एक बड़ा संकल्प लिया था.

उनका प्रण था कि वे हर महीने की पूर्णिमा पर सुल्तानगंज से पैदल चलकर देवघर बाबा धाम पहुंचेंगे और भोलेनाथ का जलाभिषेक करेंगे. पिछले तीन सालों से वे लगातार अपनी इस प्रतिज्ञा को निभा रहे हैं.

क्यों लिया ‘कैदी’ रूप?

बता दें कि जब लोगों ने उनसे शरीर पर जंजीरें लपेटने की वजह पूछी, तो पूर्व सैनिक की बातें सुनकर सब भावुक हो गए. उन्होंने बताया कि पहले तो वे आम कांवरियों की तरह सुराही लेकर बाबा धाम जाते थे. लेकिन आजकल समाज में जिस तरह से अशांति, अपराध, सामाजिक तनाव और युवाओं की असमय मौतें हो रही हैं, उससे उनका दिल बैठ गया है.

इसी सामाजिक पीड़ा को व्यक्त करने और लोगों को एक सकारात्मक संदेश देने के लिए उन्होंने खुद को जंजीरों में जकड़ लिया है. उनका कहना है कि ये यात्रा सिर्फ उनकी व्यक्तिगत भक्ति नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में शांति, आपसी भाईचारे और देश के युवाओं के उज्ज्वल भविष्य की कामना के लिए है.

फिलहाल, उनकी इस अनोखी भक्ति को देखने के लिए कांवरिया पथ पर हर कोई रुक रहा है और पांच गांवों के श्रद्धालुओं का एक पूरा जत्था भी उनके साथ बाबा धाम की ओर बढ़ चला है.

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-भारत एक्सप्रेस



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