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Rahu Temple: राहु का कटा हुआ सिर गिरा था यहां पर, देश के कोने-कोने से आते हैं लोग ग्रह शांति के लिए

देश में एक मंदिर ऐसा भी है, जहां पूजा-पाठ करने से राहु की पीड़ा से मुक्ति मिलती है. राहु ग्रह की शांति के लिए देश-दुनिया से लोग यहां आते हैं. मंदिर के साथ कई रहस्य भी जुड़े हैं.

rahu temple

राहु का मंदिर

Rahu Temple: कुंडली में अगर राहु की दशा चल रही है या फिर राहु अशुभ स्थान पर बैठे हैं तो देश में एक मंदिर ऐसा भी है, जहां पूजा-पाठ करने से राहु की पीड़ा से मुक्ति मिलती है. राहु ग्रह की शांति के लिए देश-दुनिया से लोग यहां आते हैं. उत्तराखंड के पौड़ी जिले में कोटद्वार के थलीसैण ब्लॉक में स्थित राहु का यह मंदिर ऐतिहासिक माना जाता है. ऐसी मान्यता है कि यहां की गई पूजा कभी व्यर्थ नहीं जाती. वास्तुकला के लिहाज से भी यह बेहद ही खास है. इस मंदिर में भगवान शिव जी के साथ ही राहु की पूजा की जाती है. इसे राहु का एकलौता ऐसा मंदिर भी माना जाता है, जहां शिव जी और राहु की साथ में पूजा की जाती है.

मंदिर को लेकर क्या है मान्यता

कहते हैं कि राहु के प्रकोप से शायद ही कोई बचा हो. राहु को कलियुग का देवता भी कहा जाता है. यही कारण है कि मंदिर में दूर-दूर से आते हैं. मंदिर के साथ कई रहस्य भी जुड़े हैं. मान्यतानुसार मंदिर को बनाने का श्रेय आदि गुरु शंकराचार्य जी को जाता है. हालांकि दूसरी मान्यता यह भी है कि राहु दोष से बचने के लिए पांडवों ने इस मंदिर का निर्माण कराने के बाद, पूरे विधि पूर्वक भगवान शिव शंकर और राहु की उपासना की थी. आज भी इस मंदिर में राहु और शिवजी की पूजा की जाती है. मंदिर के दीवारों पर सुदर्शन चक्र और राहु के कटे सिर को बेहद ही खूबसूरती के साथ उकेरा गया है. इसके गर्भगृह में शिवलिंग स्थापित है. जिसके बारे में कहा जाता है कि इसे स्वयं राहु ने ही स्थापित किया था. राहु शिव जी का भक्त था, जिस कारण शिव जी के भक्तों पर यह अपनी दशा या महादशा के दौरान किसी तरह का नुकसान नहीं पहुंचाता.

मंदिर में लगता है विशेष भोग

जो कोई भी इस मंदिर में राहु दोष निवारण के लिए आता है वह प्रसाद के रुप में मूंग की खिचड़ी का भोग जरूर लगाता है. यहां होने वाले भंडारे में भी सभी को प्रसाद के रूप में मूंग की खिचड़ी ही दी जाती है. मंदिर का प्राचीनता को देखते हुए इसका संरक्षण भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के अधीन है.



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