सावन (Sawan) महीने में भक्त भगवान शिव (Lord Shiva) की भक्ति में झूमते हैं. ये भक्ति पूरे भारत में चरम पर होती है. जहां तक शिव की नगरी काशी (Kashi) की बात है तो यहां आस्था का रंग और भी गहरा हो जाता है. काशी के कैथी गांव के पास स्थित मार्कण्डेय महादेव मंदिर ऐसा ही एक स्थान है. ये मंदिर श्रद्धालुओं के लिए बेहद खास है.
क्या है इस मंदिरा का महत्व ?
मार्कण्डेय महादेव मंदिर (Markandeya Mahadev Temple) की सबसे अनोखी बात ये है कि यमराज यानी मृत्यु के देवता भी एक समय में यहां हार गए थे. धार्मिक कथा कि माने तो ऋषि मृकण्ड के बेटे मार्कण्डेय की उम्र सिर्फ 14 साल तय हुई थी. जब यमराज मार्कण्डेय को लेने आए तो उनके माता-पिता ने गंगा और गोमती के संगम पर रेत से शिवलिंग बनाकर भगवान शिव की तपस्या की थी. जिसके बाद भगवान शिवजी प्रकट हुए और यमराज को रोक दिया. उन्होंने यमराज से कहा कि उनका भक्त हमेशा अमर रहेगा. इस दौरान उन्होंने ये भी कहा कि मार्कण्डेय की पूजा सबसे पहले की जाएगी. तभी से यह मंदिर श्रद्धा का केंद्र बन गया.

सावन में त्रयोदशी के दिन विशेष पूजा
सावन महीने में मार्कण्डेय महादेव मंदिर में ज़बरदस्त भीड़ उमड़ती है. ‘हर हर महादेव’ की गूंज हर ओर सुनाई देती है. त्रयोदशी के दिन यहां विशेष पूजा भी होती है. पूजा के दौरान महिलाएं पुत्र की प्राप्ति और पति की लंबी उम्र की कामना करती हैं. सावन महीने में महामृत्युंजय जाप, रुद्राभिषेक, शिवपुराण और सत्यनारायण कथा जैसे धार्मिक आयोजन किए जाते हैं. महाशिवरात्रि पर दो दिनों तक जलाभिषेक भी की जाती है.
यमराज का नहीं रहता है डर
ऐसी मान्यता है कि अगर इस मंदिर में बेलपत्र पर प्रभु श्रीराम का नाम लिखकर शिवजी पर चढ़ाया जाता है तो पुत्र की आयु लंबी होती है और यमराज (Yamraj) का कोई भी भय नहीं रहता है. उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) पर्यटन विभाग भी इस मंदिर को शिव की कृपा का प्रतीक मानता है.
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