Bharat Express DD Free Dish

ताजमहल से ज्यादा खुबसूरत, आगरा के Dayalbagh में 120 सालों में बनकर तैयार हुआ मंदिर, सोने-चांदी का हुआ है इस्तेमाल

आगरा का ताजमहल तो पूरी दुनिया में मशहूर है लेकिन उसी शहर के Dayalbagh इलाके में एक और शानदार इमारत है जो अब लोगों का ध्यान खींच रही है.

ताजमहल से ज्यादा खुबसूरत, आगरा के Dayalbagh में 120 सालों में बनकर तैयार हुआ मंदिर, सोने-चांदी का हुआ है इस्तेमाल - भारत एक्सप्रेस

Dayalbagh UP News: आगरा का ताजमहल तो पूरी दुनिया में मशहूर है लेकिन उसी शहर के दयालबाग (Dayalbagh) इलाके में एक और शानदार इमारत है जो अब लोगों का ध्यान खींच रही है. यह कोई मकबरा नहीं है बल्कि एक भव्य मंदिर है. राधास्वामी मत के संस्थापक पूरन धानी महाराज की स्मृति में बना स्वामी बाग मंदिर है. इसकी खास बात यह है कि इसका निर्माण पिछले 120 सालों से चल रहा है और अब लगभग पूरा हो चुका है.

मंदिर में सोने चांदी का प्रयोग

इस मंदिर को बनाने में मजदूरों की चार पीढ़ियां लग चुकी हैं. सफेद संगमरमर से बनी इस इमारत की नक्काशी, सजावट और कलश की चमक देखते ही बनती है. मंदिर का कलश आगरा में सबसे बड़ा और चमकदार माना जाता है जिसमें सोने और चांदी का प्रयोग हुआ है. यहां पूरन धानी महाराज की प्रतिमा भी स्थापित है.

क्यों है खास ?

मंदिर की नींव 19वीं सदी में रखी गई थी जिसमें 52 कुएं बनाए गए और गहराई में पत्थर डालकर मजबूत ढांचा तैयार किया गया. इसमें पांच मुख्य द्वार हैं जो राधास्वामी नाम के पांच अक्षरों का प्रतीक हैं. मंदिर की दीवारों पर फल-सब्जियों की बेलें पत्थर से तराशी गई हैं और हर बेल का वैज्ञानिक नाम भी लिखा गया है. खास बात यह है कि पूरी डिजाइनों में सिर्फ एक जीवित कृति तितली को दर्शाया गया है.

इसे भी पढ़ेंRahul Gandhi के घर पर विपक्ष की बड़ी बैठक, चुनावी धांधली से लेकर ऑपरेशन सिंदूर तक होंगे मुद्दे

मंदिर बनाने में नहीं लिया गया चंदा

इस मंदिर का खर्च सिर्फ राधास्वामी मत के अनुयायियों ने उठाया है. यहां दर्शनार्थियों से कोई चंदा या दान नहीं लिया जाता है. निर्माण कार्य में हर साल करीब 7 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं. श्रद्धालुओं के लिए दर्शन की व्यवस्था इतनी सुंदर है कि क्रेन से भी पूरे परिसर का नजारा कराया जाता है.

विदेशी पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र

यह मंदिर अब न सिर्फ देशी श्रद्धालुओं बल्कि विदेशी पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बनता जा रहा है. इसकी खूबसूरती और आध्यात्मिकता ताजमहल को टक्कर देती है लेकिन मकसद पूरी तरह अलग है. इसके पीछे का मकसद श्रद्धा और सेवा का प्रतीक है.

Also Follow Bharat Express on X

-भारत एक्सप्रेस



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read