Bharat Express DD Free Dish
Kanya Sumangla Mission Shakti Digital
Kanya Sumangla Mission Shakti Digital

Chhath Puja 2025: आखिर क्यों है छठ पूजा के दिन कोसी भरने की प्रथा? जानें इसके पीछे का धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व

छठ पूजा भारत का प्रमुख पर्व है. यह पर्व सूर्य उपासना और आस्था का एक अनोखा संगम है, जिसमें सूर्य देव और छठी मैया की आराधना की जाती है, जिससे परिवार में  सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और संतति बनी रहे.

छठ पूजा भारत का प्रमुख पर्व है. यह पर्व सूर्य उपासना और आस्था का एक अनोखा संगम है, जिसमें सूर्य देव और छठी मैया की आराधना की जाती है, जिससे परिवार में  सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और संतति बनी रहे. इस पूजा में  कोसी भरने की एक विशेष परंपरा है, जो छठ पूजा के तीसरे दिन पर की जाती है.

क्या है कोसी भरने का महत्व?

धार्मिक  मान्यताओं के अनुसार छठ पूजा के तीसरे दिन डूबते सूर्य को अर्घ्य अर्पित करते हैं और उसी शाम ‘कोसी’ भरने की परंपरा निभाई जाती है. इस परंपरा को श्रद्धा, कृतज्ञता और धन्यवाद का प्रतीक माना जाता है. ऐसा माना जाता है कि जब किसी की मन्नत या कोई बड़ी इच्छा पूरी होती है, तो वे छठी मैया के प्रति अपना आभार व्यक्त करने के लिए कोसी भरते हैं. साथ ही यह परिवार की समृद्धि और खुशहाली का भी प्रतीक है.

कोसी भरने का वैज्ञानिक महत्व

छठ के दौरान होने वाले इस प्रथा में कोसी में 5 गन्ने रखे जाते है, जो पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु व आकाश का प्रतीक होते है. ये जीवन में संतुलन और सामंजस्य का संदेश देते हैं. वैज्ञानिक दृष्टि से छठ पूजा के समय सूरज की रोशनी शरीर पर सीधा प्रभाव डालती हैं. ऐसे में सूर्य को अर्घ्य देने से शरीर को प्राकृतिक ऊर्जा मिलती है, जो सूरज की किरणों के संभावित हानिकारक प्रभाव से बचाव करता है.

कोसी भरने की विधि

संध्या अर्घ्य के दिन घर की छत या आंगन में गन्ने से एक छत्र या मंडप बनाया जाता है. उसके बीच में मिट्टी का हाथी रखा जाता है, जिस पर एक कलश रखा जाता है. इसके बाद कलश में  प्रसाद और पूजा सामग्री रखी जाती है. इस अवसर पर पूरे परिवार की रात जागरण रहती है और स्थानीय लोकगीत गाए जाते हैं, जिन्हें कोसी सेवना कहा जाता है.

संध्या अर्घ्य का अर्थ

संध्या अर्घ्य छठ पूजा का वह समय होता है जब व्रती डूबते सूर्य को जल अर्पित करते हैं, जिसे आभार और भक्ति का प्रतीक माना जाता है. इसमें भक्त सूर्य देव से जीवन में प्रकाश, ऊर्जा और समृद्धि की कामना करते हैं.

ये भी पढ़ें: Chhath Puja 2025: सिर्फ भारत नहीं, विदेशों में भी मनाया जाता है बिहार का प्रसिद्ध महापर्व, जानें कब और कैसे होती है पूजा

-भारत एक्सप्रेस



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read


Kanya Sumangla Mission Shakti Digital