इस्लामाबाद में हुए आतंकी हमले का असर सिर्फ शहर तक सीमित नहीं रहा बल्कि पाकिस्तान और श्रीलंका के बीच चल रही वनडे सीरीज पर भी पड़ गया. राजधानी में कोर्ट के बाहर हुए कार धमाके ने श्रीलंकाई क्रिकेट टीम को इतना डरा दिया कि कई खिलाड़ियों ने पाकिस्तान छोड़ने का मन बना लिया था.
क्या है पूरा मामला?
मंगलवार 11 नवंबर को हुए धमाके के बाद श्रीलंकाई टीम में खलबली मच गई. खबरें आईं कि करीब 8 से 10 खिलाड़ी सीरीज बीच में छोड़कर वापस श्रीलंका लौटना चाहते हैं. इससे पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) के अध्यक्ष मोहसिन नकवी की मुश्किलें बढ़ गईं. उन्होंने तुरंत श्रीलंकाई टीम को मनाने की कोशिशें शुरू कर दीं.
शेड्यूल में बदलाव
गुरुवार 13 नवंबर को दूसरा वनडे मैच खेला जाना था, लेकिन श्रीलंकाई खिलाड़ियों की चिंता के चलते पूरा शेड्यूल ही खतरे में पड़ गया. हालात को संभालने के लिए PCB ने बुधवार देर रात फैसला लिया कि सीरीज के बचे हुए दोनों मैच एक-एक दिन आगे बढ़ा दिए जाएंगे. अब ये मुकाबले 14 और 16 नवंबर को खेले जाएंगे.
श्रीलंका क्रिकेट बोर्ड का सख्त बयान
हालांकि, ये मैच होंगे या नहीं, इस पर अभी भी सस्पेंस बना हुआ है. श्रीलंकाई खिलाड़ियों की उपलब्धता पर सब कुछ निर्भर करता है. इसी बीच श्रीलंका क्रिकेट बोर्ड (SLC) ने भी एक सख्त बयान जारी किया. उन्होंने अपने खिलाड़ियों को धमकी दी कि अगर कोई खिलाड़ी या सपोर्ट स्टाफ बीच में दौरा छोड़ता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.
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SLC के इस आदेश में खिलाड़ियों की सुरक्षा की चिंता कम और सीरीज को पूरा कराने का दबाव ज्यादा नजर आया. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या खिलाड़ियों की जान से ज्यादा जरूरी है एक क्रिकेट मैच? फिलहाल, सबकी नजर इस पर है कि श्रीलंकाई टीम मैदान पर उतरती है या नहीं.
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-भारत एक्सप्रेस
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