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34 साल बाद पेरिस में रचा गया इतिहास! 19 वर्षीय मीरा आंद्रीवा बनीं फ्रेंच ओपन की सबसे युवा विमेंस चैंपियन

French Open: फ्रेंच ओपन में शनिवार को खेले गए विमेंस सिंगल्स के फाइनल में 19 वर्षीय मीरा आंद्रीवा ने माजा च्वालिंस्का को 6-3, 6-2 से हराकर अपना पहला ग्रैंड स्लैम खिताब जीता. इसी के साथ, आठवीं वरीयता प्राप्त रूसी खिलाड़ी साल 1992 में मोनिका सेलेस के लगातार तीसरा खिताब जीतने के बाद से पेरिस में सबसे युवा महिला सिंगल्स चैंपियन बन गईं.

French Open

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French Open: फ्रेंच ओपन में शनिवार को खेले गए विमेंस सिंगल्स के फाइनल में 19 वर्षीय मीरा आंद्रीवा ने माजा च्वालिंस्का को 6-3, 6-2 से हराकर अपना पहला ग्रैंड स्लैम खिताब जीता. इसी के साथ, आठवीं वरीयता प्राप्त रूसी खिलाड़ी साल 1992 में मोनिका सेलेस के लगातार तीसरा खिताब जीतने के बाद से पेरिस में सबसे युवा महिला सिंगल्स चैंपियन बन गईं.

स्टेड रोलैंड-गैरोस में यह मुकाबला 1 घंटे 22 मिनट तक चला. फाइनल की शुरुआत घबराहट के साथ हुई, क्योंकि तेज हवाओं का असर दोनों खिलाड़ियों पर पड़ रहा था. शुरुआती चार गेम में लगातार सर्विस ब्रेक हुए, क्योंकि कोई भी खिलाड़ी जल्दी लय में नहीं आ पा रहा था. वर्ल्ड नंबर 114 च्वालिंस्का अपनी सर्विस होल्ड करने वाली पहली खिलाड़ी बनकर कुछ देर के लिए दर्शकों का दिल जीता.

संयम से खेल दिखाया और पहचान बन गया

हालांकि, आंद्रीवा ने जल्द ही अपनी लय हासिल कर ली और वह संयम दिखाया जो उनके खेल की पहचान बन गया है. उन्होंने लगातार नौ गेम जीतकर मैच पर पूरी तरह से अपना दबदबा बना लिया; कड़े मुकाबले वाले शुरुआती सेट से आगे बढ़कर उन्होंने 6-3, 5-0 की मजबूत बढ़त हासिल कर ली. हालांकि, वह अपनी पहली कोशिश में मैच सर्व करने का मौका चूक गईं, लेकिन आंद्रीवा ने संयम बनाए रखा और च्वालिंस्का की सर्विस पर जीत हासिल की. ​​इसके साथ ही उन्होंने अपने युवा करियर का सबसे बड़ा खिताब जीता और फ्रेंच ओपन के इतिहास में अपना नाम दर्ज कराया.

रोलैंड-गैरोस में इस युवा खिलाड़ी का सफर शानदार रहा है. वह पहली बार 2023 में क्वालीफाइंग राउंड से गुजरकर मेन ड्रॉ में पहुंची थीं और सेमीफाइनल तक का शानदार सफर तय करके अपनी पहचान बनाई. दो साल बाद, आंद्रीवा इस मशहूर क्ले-कोर्ट टूर्नामेंट में लौटीं और आखिरकार प्रतिष्ठित खिताब अपने नाम किया.

भावुक होकर कोर्ट में गिर पड़ीं आंद्रीवा

जीत के बाद, भावुक आंद्रीवा जश्न में कोर्ट पर गिर पड़ीं और फिर अपनी कोच कोंचिता मार्टिनेज को गले लगाया. पूर्व वर्ल्ड नंबर 2 और 1994 की विंबलडन चैंपियन मार्टिनेज ने आंद्रीवा के खेल को निखारने में अहम भूमिका निभाई है.

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ट्रॉफी सेरेमनी के दौरान आंद्रीवा ने कहा कि मैं बहुत छोटी उम्र से ही टीवी पर रोलैंड-गैरोस देखती आ रही हूं. इस टूर्नामेंट को जीतना हमेशा से मेरा सपना रहा है. सच कहूं तो मुझे यकीन ही नहीं हो रहा है कि अभी मेरे हाथों में यह ट्रॉफी है.

(IANS के इनपुट पर आधारित)



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