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MS Dhoni Birthday: टिकट चेकर से वर्ल्ड कप विजेता तक, दबाव में शांत रहने वाला शेर, कैप्टन कूल के 10 अनसुने किस्से

MS Dhoni Birthday: महेंद्र सिंह धोनी का जन्मदिन क्रिकेट प्रेमियों के लिए किसी उत्सव से कम नहीं. रेलवे टिकट चेकर से लेकर वर्ल्ड कप विजेता बनने तक का उनका सफर जुनून, मेहनत और शांत स्वभाव की मिसाल है.

Edited by Vaibhav Gupta

MS Dhoni Birthday: 7 जुलाई भारतीय क्रिकेट के लिए एक यादगार दिन है. इसी तारीख को जन्मे महेंद्र सिंह धोनी ने यह साबित कर दिया कि असली हीरो वही होता है जो मुश्किल हालात में चुपचाप जीत छीन लाता है.

टीटी से कप्तान तक

धोनी का सफर रेलवे टिकट चेकर से शुरू होकर भारतीय टीम के कप्तान तक पहुंचा. बाइक के शौकीन माही ने अपनी मेहनत और जुनून से वर्ल्ड कप जीतकर दुनिया को दिखा दिया कि सपने सच होते हैं.

पहली पसंद फुटबॉल

कम लोग जानते हैं कि धोनी का पहला प्यार क्रिकेट नहीं बल्कि फुटबॉल था. स्कूल में वह गोलकीपर थे, लेकिन एक मौके ने उन्हें क्रिकेट टीम का विकेटकीपर बना दिया और वहीं से उनकी कहानी बदल गई.

सचिन से प्रेरणा

धोनी बचपन से ही सचिन तेंदुलकर को अपना आदर्श मानते थे. वह सचिन के पोस्टर घर की दीवार पर लगाते और उनके मैच देखने के लिए सुबह जल्दी उठ जाते. सचिन आउट होते ही धोनी टीवी बंद कर देते थे.

रेलवे की नौकरी छोड़ दी

क्रिकेट में आने से पहले धोनी रेलवे में टिकट चेकर की नौकरी करते थे. लेकिन बड़े सपनों ने उन्हें नौकरी छोड़ने पर मजबूर किया और उन्होंने कप्तान बनकर भारत को कई ट्रॉफियां दिलाईं.

लंबे बालों की पहचान

पाकिस्तान के खिलाफ डेब्यू मैच में धोनी रन आउट हो गए थे, लेकिन उनके लंबे बाल और आक्रामक अंदाज ने सबका ध्यान खींचा. यहां तक कि पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ ने भी उनकी तारीफ की थी.

बाइक का जुनून

धोनी को बाइक का जबरदस्त शौक है. पहली कमाई से उन्होंने सेकंड हैंड बाइक खरीदी थी. आज उनके पास 50 से ज्यादा बाइक्स हैं और रांची में उनका बाइक म्यूजियम भी है.

कैप्टन कूल का टैग

धोनी को मैदान पर हमेशा शांत देखा गया. आखिरी ओवरों में जब हर कोई दबाव में होता, तब धोनी अपने दस्ताने कसकर सब संभाल लेते. इसी वजह से उन्हें ‘कैप्टन कूल’ कहा जाता है.

टीम पहले, खुद बाद में

धोनी हमेशा टीम को खुद से आगे रखते हैं. वर्ल्ड कप जीतने के बाद जब सब ट्रॉफी के साथ फोटो खिंचवा रहे थे, तब धोनी पीछे खड़े थे. उनके लिए टीम की खुशी सबसे अहम थी.

साइकल से पहुंचे स्टेडियम

एक बार रांची में ट्रैफिक जाम की वजह से धोनी अपनी बाइक या कार से स्टेडियम नहीं जा पाए. उन्होंने पास से एक साइकल ली और पैडल मारते हुए नैट प्रैक्टिस के लिए पहुंच गए.

मां नहीं देखती थीं मैच

धोनी के परिवार वाले उनके मैच टीवी पर देखते थे, लेकिन उनकी मां कभी मैच नहीं देखती थीं. उन्हें डर रहता था कि बेटा आउट न हो जाए.

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कप्तानी छोड़ी, गाइडिंग जारी रखी

वनडे और टी20 की कप्तानी छोड़ने के बाद भी धोनी टीम के साथ बने रहे. वह हमेशा युवाओं को गाइड करते और उन्हें सपोर्ट करते नजर आते हैं.

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-भारत एक्सप्रेस



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