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1984 Riot

हरदीप सिंह पुरी (Hardeep Singh Puri) ने कहा कि मैं आज भी 1984 के उन दिनों को याद करके सिहर उठता हूं, जब असहाय और निर्दोष सिख पुरुषों, महिलाओं और बच्चों का बिना सोचे-समझे कत्लेआम किया गया था.

कोर्ट ने शिकायतकर्ता की वकील कामना वोहरा को दो दिन के भीतर लिखित दलीलें दाखिल करने का निर्देश दिया है. सज्जन की और से पेश अधिवक्ता अनिल शर्मा ने कहा कि सज्जन कुमार का नाम लेने में 16 साल की देरी हुई.