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Ashok Gehlot

राजस्थान में इस बार होने वाले विधानसभा चुनाव साल 2013 और 2018 के चुनावों से अलग हैं। पिछले दोनों चुनावों में राहुल गांधी लीड कर रहे थे, लेकिन इस बार खुद मुख्यमंत्री गहलोत फ्रंट फुट पर खेल रहे हैं। 2003, 2008 व 2013 के चुनाव वसुंधरा V/S गहलोत थे।

Rajasthan Election 2023: पिछले चुनाव की बात करें तो राजस्थान में 38 जाट और आठ गुर्जर विधायक जीते थे. कांग्रेस ने 15 मुस्लिम उतारे थे, लेकिन जीते सिर्फ 7. मीणा से 18 विधायक बने. इनमें कांग्रेस के 9 और भाजपा के पांच और तीन निर्दलीय हैं.

राजस्थान विधानसभा चुनाव से पहले एक मोर्चे पर कांग्रेस के खेमे में राहत नजर आ रही है. लंबे समय से सीएम अशोक गहलोत और पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट के बीच खींचतान अब नरमी में तब्दील होती नजर आई है.

कांग्रेस का राष्ट्रीय नेतृत्व राजस्थान में टिकट चयन प्रक्रिया के प्रारंभिक चरण को सिर्फ प्रदेश चुनाव समिति और स्क्रीनिंग कमेटी के भरोसे नहीं छोड़ना चाहता। पैनल बनने से लेकर नाम फाइनल होने तक दिल्ली का पूरा दखल रहेगा। एआईसीसी का पूरा फोकस है कि एक भी कमजोर और सिफारिशी उम्मीदवार मैदान में न आने पाए।

सीएम अशोक गहलोत के विजन-2030 डॉक्यूमेंट के लिए अब तक 3 करोड़ 14 लाख 66 हजार 312 सुझाव आए हैं। ये सुझाव विषय विशेषज्ञों ने नहीं बल्कि प्रदेश के आमजन ने दिए हैं। आम आदमी को फ्री की दो ही चीजें दीजिए- शिक्षा व स्वास्थ्य। पब्लिक का कहना है कि मनरेगा पर भारी पैसा लग रहा है,मॉडल बदलिए।

राजस्थान में उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के ताबड़तोड़ दौरे चर्चा में हैं. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने जयपुर में आयोजित एक सरकारी कार्यक्रम में इस पर खुलकर आपत्ति जताई है. गहलोत ने कहा है कि उपराष्ट्रपति एक दिन में चार-पांच दौरे कर रहे हैं.पूरे प्रोटोकॉल के तहत दौरे पर आ रहे हैं जबकि राजस्थान में चुनाव हैं.

Rajasthan Politics: माना जा रहा है कि पायलट के सुर भले ही नरम पड़े हों लेकिन उनके समर्थकों के तेवर अभी भी तीखे हैं.

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि मैं मुख्यमंत्री का पद छोड़ना चाहता हूं, लेकिन यह पद मुझे नहीं छोड़ रहा है. भाजपा पर हमला बोलते हुए कहा कि यदि कोई भाजपा के अलावा किसी पार्टी को पैसा देता है तो ईडी, इनकम टैक्स का डर रहता है.

राजस्थान में ओबीसी फैक्टर विधानसभा चुनावों में पूरी सियासत को हर बार बदलता है. विधानसभा चुनावों को आम तौर पर सरसरी निगाह से देखें तो पूरा प्रदेश जातियों में बंटा नज़र आता है. ओबीसी में शामिल जातियां किसी एक मंच पर दिखाई नहीं देती हैं.

पिछले चुनाव में प्रचार का कमान संभालने वाली वसुंधरा राजे पार्टी की परिवर्तन यात्रा से दूर रहीं. इससे पहले, वसुंधरा को पिछले विधानसभा चुनाव से पहले आयोजित भाजपा की परिवर्तन यात्रा, सुराज संकल्प यात्रा और अन्य यात्राओं में "अग्रणी भूमिका" निभाते हुए देखा गया था.