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गुजरात विधानसभा चुनाव के दूसरे व अंतिम चरण में राज्य के 14 जिलों की 93 सीट पर मतदान शुरू हुआ, अहमदाबाद, वडोदरा एवं गांधीनगर सहित 14 जिलों के इन 93 विधानसभा क्षेत्रों में बीजेपी के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल सहित 61 राजनीतिक दलों के कुल 833 उम्मीदवार मैदान में हैं.

Delhi MCD Election: 4 दिसंबर को हुए मतदान में कुल 250 वार्डों में कुल 50.47 फीसदी मतदान हुआ है. जबकि पिछले MCD चुनाव में इस बार के मुकाबले 3 प्रतिशत मतदान ज्यादा हुआ था. 2017 में 53.55 प्रतिशत हुआ था.

BJP Meeting: दो दिवसीय राष्ट्रीय पदाधिकारी बैठक की तैयारियों और इसके एजेंडों पर चर्चा करने के लिए जेपी नड्डा ने रविवार को पार्टी मुख्यालय में पार्टी के राष्ट्रीय महासचिवों के साथ बैठक भी की.

UP Bypolls: मैनपुरी संसदीय क्षेत्र से खतैली विधानसभा तक भाजपा की राह आसान नहीं है. ना मैनपुरी में, ना रामपुर में, ना खतौली में. हालांकि भाजपा का दावा यही है कि, आठ दिसंबर को तीनों सीटों पर भगवा ब्रिगेड की जीत का झंडा लहराएगा.

Giriraj Singh: केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने बेगूसराय में जनसंख्या नियंत्रण कानून पर बयान देते हुए हुए सांसद बदरुद्दीन अजमल पर कड़ा प्रहार किया है, जिसमें अजमल कहा था कि हिंदुओं को मुसलमानों के फॉर्मूले को अपनाकर अपने बच्चों की 18-20 साल की उम्र में शादी करा देनी चाहिए.

गुजरात में कांग्रेस ने पिछले दो विधानसभा चुनावों में उत्तरी क्षेत्र में बीजेपी की तुलना में अच्छा प्रदर्शन किया है. 2022 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की कोशिश बढ़त बनाकर रखने की है.

गुजरात विधानसभा चुनाव 2022 के पहले चरण का मतदान पूरा हो चुका है. कुछ सीटों पर मतदान को लेकर मतदाताओं में खासा उत्साह देखने को मिला है तो कुछ सीटों पर सुस्त मतदान हुआ है. दूसरे चरण की 93 सीटों के लिए मतदान 5 दिसंबर को होगा. जबकि मतगणना की प्रक्रिया आठ दिसंबर को होगी.

Mainpuri Election: मैनपुरी उपचुनाव में कुल छह प्रत्याशी मैदान में हैं लेकिन इनमें से 2 प्रत्याशी ऐसे हैं, जिन्हें खुद अपना और परिवार का वोट नहीं मिल सकेगा.

एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) ने एक रिपोर्ट जारी की है जिसमे बताया गया है कि भाजपा की उम्मीदवार रामदेवी वर्मा समसे पढ़ी लिखीं उम्मीदवार हैं वहीं 6 ऐसे उम्मीदवार हैं जिनके पास पीएचडी की डिग्री है.

गांधी जी ने अंग्रेज हुकूमत के खिलाफ कई जन आंदोलनों का नेतृत्व किया और साबरमती आश्रम सत्याग्रह और डांडी मार्च जैसे आंदोलनों का साक्षी रहा. गांधी जी ने हालांकि 31 जुलाई 1933 को साबरमती आश्रम छोड़ दिया, लेकिन उनकी यादों को आज भी इस आश्रम में सहेजकर रखा गया है.