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Ganga Aarti

Multan Jyot Mahotsav: हरिद्वार के ब्रह्मकुंड में मुल्तान समाज के श्रद्धालुओं ने माँ गंगा का दुग्धाभिषेक कर दूध की होली खेली और देश-विश्व की शांति की प्रार्थना की. 1911 में शुरू हुई यह परंपरा अब 116वें ‘मुल्तान ज्योत महोत्सव’ तक पहुंच चुकी है, जिसमें देशभर से श्रद्धालु शामिल हुए.

उत्तराखंड सरकार वर्ष 2027 में प्रस्तावित अर्धकुंभ मेले को देखते हुए हरिद्वार क्षेत्र में गंगा घाटों की पवित्रता और व्यवस्था को लेकर बड़े फैसलों पर गंभीरता से विचार कर रही है। इसी क्रम में हरिद्वार के गंगा घाटों पर गैर-हिंदुओं के प्रवेश को लेकर सख्त नियम लागू करने का प्रस्ताव चर्चा में है। सरकार हरिद्वार के लगभग 120 वर्ग किलोमीटर में फैले 105 प्रमुख गंगा घाटों पर गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने की संभावनाओं का अध्ययन कर रही है।

New Year 2026 Celebrations : साल 2025 को लोगों ने अलविदा कह दिया है और 2026 का (Happy New Year 2026) आगाज हो गया है। जहां रात को लोगों ने जश्न (New Year Celebration) मनाया तो वहीं सुबह होते ही देशभर के मंदिरों में (crowd at temple) साल के पहले दिन भक्तों को भारी भीड़ दिखी। जहां लोग मंदिरों में दर्शन के लिए पहुंचे। भक्तों को दर्शन के लिए कई घंटों लंबी लाइनों में इंतजार करना पड़ रहा है। देखिए देशभर के मंदिरों का नजारा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 11 सितंबर को अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी का दौरा करेंगे और मॉरीशस के प्रधानमंत्री नवीनचंद्र रामगुलाम के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे. मॉरीशस पीएम 10 से 12 सितंबर तक वाराणसी में रहेंगे. कार्यक्रम में गंगा आरती, काशी विश्वनाथ मंदिर दर्शन और सांस्कृतिक स्वागत शामिल हैं.

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने त्रिवेणी संगम में पवित्र स्नान कर मां गंगा से देशवासियों की सुख, समृद्धि और शांति की प्रार्थना की और इस मौके पर महाकुंभ की सांस्कृतिक महिमा को सराहा. उन्होंने सोशल मीडिया पर भी अपनी श्रद्धा और आस्था व्यक्त की.

PM In Kashi: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल साइट एक्स पर एक वीडियो शेयर करते हुए लिखा कि अपनी काशी से मेरा रिश्ता अद्भुत है, अभिन्न है और अप्रतिम है. इसे शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता!

काशी में जी-20 सदस्यों के विकासमंत्रियों की हो रही बैठक में हिस्सा लेने आए विदेशी प्रतिनिधि रविवार शाम को गंगा आरती में शामिल हुए.

Varanasi: मां गंगा की आरती के समय मिलने वाले अलौकिक सुख को शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता. ऐसा लगता है मानों दशाश्वमेध घाट पर देवता उतर आए हों.