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Uttar Pradesh Police Mission Shakti Digital
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Gyanesh Kumar

चुनाव आयोग के काम करने के तरीके और वोटर लिस्ट के स्पेशल गहन रिवीजन यानी SIR को लेकर विपक्ष का गुस्सा मंगलवार 6 अक्टूबर को दिल्ली में बड़े हंगामे में बदल गया.

केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने मंगलवार को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा कार्यकर्ताओं से निस्वार्थ सेवा की सीख लेनी चाहिए.

SIR के खिलाफ INDIA ब्लॉक के 140 से ज्यादा सांसदों ने संसद भवन से निर्वाचन सदन तक विरोध मार्च निकाला. सांसदों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए नारेबाजी की.

जंतर-मंतर पर चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर जारी प्रदर्शन के बीच दिल्ली पुलिस ने पत्रकारों के लिए नई गाइडलाइन जारी की है.

SIR और चुनाव आयोग के खिलाफ INDIA ब्लॉक के 140 से ज्यादा सांसदों ने संसद से निर्वाचन सदन तक मार्च किया. पुलिस ने बैरिकेड लगाकर प्रदर्शनकारियों को रोका, जिसके बाद राहुल गांधी, प्रियंका गांधी समेत कई विपक्षी नेता धरने पर बैठ गए.

पटियाला हाउस कोर्ट ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तार किए गए 17 छात्रों और फ्रीलांस पत्रकारों को जमानत दे दी.

INDIA Alliance March: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग को लेकर INDIA गठबंधन के तय कार्यक्रमों के तहत मंगलवार को सभी विपक्षी दलों के सांसद संसद भवन से चुनाव आयोग तक शांतिपूर्ण मार्च करेंगे. विपक्ष की मांग है कि SIR प्रक्रिया में गड़बड़ियों को लेकर जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जाए और चुनाव आयोग को और पारदर्शी बनाया जाए.

भारत के लोकतंत्र में मुख्य चुनाव आयुक्त का पद हमेशा से विशेष महत्व रखता रहा है. यह पद ना सिर्फ स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी वहन करता है, बल्कि समय-समय पर राजनीतिक दबावों के बीच अपनी विश्वसनीयता साबित करने की भी परीक्षा देता है.

इंडियन यूथ कांग्रेस ने जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन की अनुमति नहीं देने के दिल्ली पुलिस के 1 अक्टूबर के आदेश को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी है.

Election Commission Dispute: भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) के पूर्व संयुक्त निदेशक मोहम्मद अमीन ने बुधवार को कहा कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और ज्ञानेश कुमार द्वारा कैबिनेट सचिव को लिखे गए कथित पत्र प्रोटोकॉल के खिलाफ थे और इसके बजाय उन्हें कानून और न्याय मंत्रालय या राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को संबोधित किया जाना चाहिए था.