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legal case

चेक बाउंस मामले में दोषी बॉलीवुड अभिनेता और मशहूर कॉमेडियन राजपाल यादव को सुप्रीम कोर्ट से फिलहाल राहत मिल गई है.

दिल्ली हाई कोर्ट ने चेक बाउंस मामले में अभिनेता राजपाल यादव को 4 फरवरी तक सरेंडर करने का आदेश दिया है. अदालत ने उनके आदेश नहीं मानने और भुगतान में नाकामी को निंदनीय बताया है.

दिल्ली हाई कोर्ट में मशहूर बिजनेसमैन संजय कपूर की वसीयत को लेकर बड़ा कानूनी विवाद खड़ा हो गया है. संजय कपूर के निधन के बाद परिवार में संपत्ति के बंटवारे को लेकर तनाव इतना बढ़ गया है कि मामला अब अदालत तक पहुंच चुका है.

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में रहने वाले 83 वर्षीय जागेश्वर प्रसाद अवधिया की जिंदगी एक झूठे आरोप ने बदल दी. साल 1986 में लगे 100 रुपये की रिश्वत लेने के आरोप ने उनकी नौकरी,परिवार और सम्मान सब छीन लिया. अब,39 साल बाद हाईकोर्ट ने उन्हें पूरी तरह बरी कर दिया है. लेकिन न्याय मिलने में हुई देरी ने उनके जीवन को अपूरणीय क्षति पहुंचाई है.अवधिया इस केस से बरी होने के बाद अब सरकार से अपनी बकाया पेंशन और आर्थिक सहायता की मांग कर रहे हैं, ताकि अपने जीवन के बचे हुए दिन सुकून से गुजार सकें.

दिल्ली हाई कोर्ट ने फिल्म निर्माता करण जौहर को बड़ी राहत का संकेत दिया है. जौहर ने अपनी पहचान के गलत इस्तेमाल और एआई सामग्री के दुरुपयोग पर रोक लगाने की मांग की थी.

दिल्ली हाई कोर्ट ने वैभव जैन को दिल्ली-एनसीआर से बाहर जाने की अनुमति दी, लेकिन पासपोर्ट सरेंडर करने का आदेश दिया. ईडी ने सत्येंद्र जैन समेत कई लोगों पर मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया था.

सुप्रीम कोर्ट ने सुकेश चंद्रशेखर की याचिका खारिज की, जिसमें मंडोली जेल से दूसरी जेल ट्रांसफर करने की मांग की गई थी. कोर्ट ने चंद्रशेखर के बार-बार याचिकाएं दायर करने पर आपत्ति जताई.

सुप्रीम कोर्ट ने समाजवादी पार्टी नेता अब्दुल्ला आजम को राहत देते हुए सेंशन कोर्ट को छह महीने में मामले का निपटारा करने का आदेश दिया. यह मामला 2008 में सड़क जाम और पुलिस विवाद से जुड़ा हुआ है.

तीस हजारी कोर्ट ने 66 साल पुराने भूमि विवाद मुकदमे को खारिज कर दिया, जिसमें वादी ने बिल्डर के खिलाफ अदालत से आदेश जारी करने की मांग की थी. अदालत ने कहा कि इस मामले में कोई कब्जा छुड़ाने की मांग नहीं की गई थी और वादी अपने आरोपों को साबित करने में विफल रहे हैं.

पूर्व कांग्रेस विधायक जय किशन को राऊज एवेन्यू कोर्ट से बड़ी राहत मिली है, जहां उन्हें कोविड-19 महामारी के दौरान विरोध प्रदर्शन में निषेधाज्ञा और महामारी रोग अधिनियम के उल्लंघन के सभी आरोपों से मुक्त कर दिया गया.