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मानसून सत्र के दूसरे दिन भी संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही भारी हंगामे के कारण नहीं चल सकी. विपक्ष का कहना है कि वे संसद में नीट परीक्षा, पेपर लीक व जंतर मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों का विषय उठाना चाहते हैं.

मॉनसून सत्र के दूसरे दिन विपक्ष ने NEET परीक्षा मामले और छात्र आंदोलन पर संसद में विस्तृत चर्चा की मांग को लेकर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात की. सरकार ने कहा कि वह नियमों के तहत चर्चा के लिए तैयार है, जबकि विपक्ष ने सदन की कार्यवाही रोककर पहले इस मुद्दे पर बहस कराने की मांग की.

संसद का मॉनसून सत्र आज से शुरू हो रहा है, जहां सरकार परिसीमन समेत सात अहम विधेयकों को पारित कराने की तैयारी में है. बागी सांसदों, दो-तिहाई बहुमत के गणित और विपक्ष के तीखे विरोध के बीच सत्र बेहद अहम रहने वाला है.

नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) ने बुधवार को सोशल मीडिया पर कई पोस्ट कर अपनी संसदीय पार्टी के नेताओं को बधाई दी. पार्टी ने हाल ही में हुए बड़े राजनीतिक घटनाक्रम के बाद खुद को लोकसभा में एक प्रमुख ताकत के रूप में स्थापित करने का दावा किया है.

तृणमूल कांग्रेस में बढ़ती अंदरूनी कलह के बीच महुआ मोइत्रा ने सांसद यूसुफ पठान पर निशाना साधा है. वहीं, कई सांसदों के बागी गुट में शामिल होने की चर्चाओं ने पार्टी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं.

लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े संशोधन बिल को मंजूरी नहीं मिल पाई, जिसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तमिलनाडु में विपक्ष पर निशाना साधा है.

दो दिन की कार्यवाही में विपक्षी दलों की रणनीति ने तोड़ा आधी आबादी का सपना, वरिष्ठ समाजसेविका डॉ शालिनी अली के आलेख पर आधारित यह रिपोर्ट उन घटनाक्रमों का दस्तावेज है, जिसने देश की संसदीय राजनीति की असलियत उजागर कर दी.

Women Reservation Bill: महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़ा संविधान संशोधन बिल लोकसभा में पास नहीं हो पाया. सरकार को दो तिहाई बहुमत नहीं मिला और विपक्ष ने इसका विरोध किया. अब बीजेपी इस मुद्दे को चुनावी नैरेटिव बनाने में जुटी है.

लोकसभा में महिला आरक्षण बिल पर चर्चा के दौरान शुरू हुई सियासत अब खुलकर बयानबाजी में बदल गई है. सपा नेता अखिलेश यादव की टिप्पणी के बाद पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने भी तीखा पलटवार किया है.

संसद के विशेष सत्र में आज (शुक्रवार) महिला आरक्षण, परिसीमन समेत तीन अहम विधेयकों पर वोटिंग होने जा रही है, जिस पर पूरे देश की नजर टिकी हुई है. सरकार इन विधेयकों को ऐतिहासिक कदम बता रही है, जबकि विपक्ष समय और मंशा पर सवाल उठा रहा है.