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Lord Rama

अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के शिखर पर स्वर्ण जड़ित कलश की तस्वीर सामने आई हैं. यहां 2 जून को सरयू जल कलश यात्रा निकलेगी. 5 जून को मंदिर के प्रथम तल और परकोटा के नवनिर्मित मंदिरों में प्राण प्रतिष्ठा होगी.

अयोध्या राम जन्मभूमि मंदिर परिसर के परकोटा में स्थापित सात मंदिरों की मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा का महोत्सव 3 जून से शुरू होकर 5 जून 2025 को संपन्न होगा. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी इस ऐतिहासिक आयोजन में शामिल होंगे.

Ram Temple Construction work: राम मंदिर का निर्माण कार्य जून 2025 तक पूरा हो जाएगा. ध्वज दंड की स्थापना के साथ मंदिर अपने अंतिम चरण में है. छह अन्य मंदिरों की पूजा भी 5 जून को की जाएगी.

Ram Navami: रामनवमी के अवसर पर अयोध्या 2 लाख दीयों से रोशन हुई. सरयू तट, राम मंदिर और घाटों पर भक्तिमय माहौल के साथ सूर्य तिलक और विशेष पूजा अर्चना का आयोजन हुआ.

आप भी "अपने अपने राम" संगीतमय रामकथा सुनना चाहते हैं तो कवि कुमार विश्वास 18 जनवरी से दो शहरों में अपनी प्रस्तुति देंगे. उनके द्वारा गाई जाने वाली कथा भगवान राम के आदर्शों और जीवन को एक नए दृष्टिकोण से प्रस्तुत करती है.

भाजपा के कद्दावर नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने अचानक अयोध्या पहुंचकर राम मंदिर में भगवान के दर्शन किए. विश्व हिंदू परिषद (VHP) के महासचिव और मंदिर निर्माण समिति के प्रमुख पदाधिकारी चंपत राय ने उनका स्वागत किया.

रामलला के दर्शन करने आ रहे रामभक्तों से अपील की जा रही है कि वे धैर्य के साथ अयोध्या आएं, हड़बड़ाएं नहीं. भारी भीड़ को देखते हुए रामलला के दर्शन का समय भी बढ़ा दिया गया है. DM नीतीश कुमार ने 8 मजिस्ट्रेट तैनात किए हैं.

आज हम सब ‘राममय’ भाव में आकंठ डूबे हुए हैं। अयोध्या का यह विकास भारत के सनातन धर्मियों की आस्था के साथ ही हमारी सांस्कृतिक अस्मिता से भी जुड़ा हुआ है। पर उत्साह के अतिरेक में हमें अपनी भावनाओं को ग़लत दिशा में जाने से रोकना होगा।

अयोध्‍या में बना राम मंदिर, मात्र एक देव मंदिर नहीं है. ये भारत की दृष्टि का, भारत के दर्शन का, भारत के दिग्दर्शन का मंदिर है. ये राम के रूप में राष्ट्र चेतना का मंदिर है. राम भारत की आस्था हैं, राम भारत का आधार हैं. राम भारत का विचार हैं, राम भारत का विधान हैं.

Ram Mandir: लाखों करोड़ों की संख्या में देश दुनिया के रामभक्तों की एक मात्र यही इच्छा थी कि करीब 500 सालों से अपनी ही जन्मभूमि पर उपेक्षित प्रभु श्रीराम का अयोध्या में एक भव्य और दिव्य मंदिर हो, जहां वह श्रद्धा से सिर झुका सकें, जहां वह अपनी तकलीफों को उनसे कह सकें और जहां वह अपने गुनाहों के लिए उनसे क्षमा मांग सकें.