लखनऊ, 19 अक्टूबर 2026। राष्ट्रीय अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थान आयोग (NCMEI) के कार्यवाहक अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) शाहिद अख्त़र ने सोमवार को एरा यूनिवर्सिटी, लखनऊ के मेडिकल कॉलेज सभागार में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में कहा कि अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान देश की एकता, सांस्कृतिक विविधता और समावेशी राष्ट्र निर्माण की सबसे मज़बूत कड़ी हैं। ‘एकता, सांस्कृतिक विविधता, राष्ट्र निर्माण और विकसित भारत @2047 में अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका’ विषय पर आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में मुस्लिम राष्ट्रीय मंच (MRM) के संरक्षक डॉ. इंद्रेश कुमार उपस्थित रहे, जबकि एरा यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. (डॉ.) अब्बास अली महदी ने स्वागत भाषण दिया।
अल्पसंख्यक संस्थान: एकता और सद्भाव के प्रतीक
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रो. शाहिद अख्त़र ने कहा कि उन्हें इस अवसर पर बोलते हुए गर्व की अनुभूति हो रही है। उन्होंने NCMEI की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह आयोग भारत सरकार का अर्ध-न्यायिक निकाय है, जिसे सिविल कोर्ट के समान अधिकार प्राप्त हैं और यह अल्पसंख्यक संस्थानों को अल्पसंख्यक दर्जा प्रदान करता है। उन्होंने जानकारी दी कि आयोग अब तक 14,772 संस्थानों को अल्पसंख्यक दर्जा दे चुका है, जिनमें मुस्लिम, ईसाई, बौद्ध, पारसी, जैन और सिख समुदाय के संस्थान शामिल हैं। एरा यूनिवर्सिटी को वर्ष 2016 में अल्पसंख्यक दर्जा प्रदान किया गया था। उन्होंने बताया कि देशभर में लगभग 56,000 संस्थान आयोग के अधिकार क्षेत्र में आते हैं, जिनमें जामिया मिलिया इस्लामिया, क्राइस्ट यूनिवर्सिटी और जैन यूनिवर्सिटी जैसे प्रमुख विश्वविद्यालय शामिल हैं।
‘विविधता में एकता हमारी सबसे बड़ी ताक़त’
प्रो. अख्त़र ने ज़ोर देकर कहा कि भारत की असली शक्ति उसकी विविधता और साझा सांस्कृतिक विरासत में निहित है। उन्होंने कहा, “कुछ तत्व चाहते हैं कि समाज बंट जाए, लेकिन अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान ही इस साज़िश को विफल कर सकते हैं।” उन्होंने छात्रों से आग्रह किया कि वे केवल अच्छे डॉक्टर या इंजीनियर न बनें, बल्कि ‘बेहतरीन इंसान’ बनें, क्योंकि डॉक्टरी का पेशा सेवा और राष्ट्रहित से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यक संस्थानों को होली, दीपावली, क्रिसमस और गुरु नानक जयंती जैसे सभी त्योहारों को उत्साह से मनाना चाहिए, ताकि छात्र भारत की साझी संस्कृति को समझ सकें।
भाषा और पहचान पर महत्वपूर्ण टिप्पणी
उर्दू को केवल मुसलमानों की भाषा मानने की मानसिकता पर कड़ी आपत्ति जताते हुए प्रो. अख्त़र ने कहा कि उर्दू का जन्म इसी धरती पर हुआ है और यह किसी एक धर्म की भाषा नहीं है। उन्होंने कहा कि भारत में हर 18 किलोमीटर पर भाषा बदल जाती है, जो इस देश की सुंदरता है। उन्होंने छात्रों से अपनी पहचान धर्म के आधार पर नहीं, बल्कि राष्ट्रीय पहचान के आधार पर स्थापित करने की अपील की।
डॉ. इंद्रेश कुमार का मार्गदर्शन
कार्यक्रम में मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के संरक्षक डॉ. इंद्रेश कुमार ने अपने विचार रखते हुए कहा कि धार्मिक संघर्ष का भारत में कोई स्थान नहीं है और देश की असली ताक़त एकता, शिक्षा, नैतिकता और मानवता में है। उन्होंने युवाओं से अपनी पहचान को ताकत का स्रोत मानने और संविधान द्वारा दिए गए समान अधिकारों का सम्मान करने का आह्वान किया।
विकसित भारत @2047 का संकल्प
कार्यक्रम के अंत में प्रो. अख्त़र ने कहा कि विकसित भारत @2047 का सपना तभी साकार होगा जब शिक्षा ऐसी हो जो केवल नौकरी के लिए नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण के लिए हो। उन्होंने एरा यूनिवर्सिटी द्वारा स्वास्थ्य सेवा में आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल तकनीक के उपयोग की सराहना की और इसे राष्ट्र निर्माण की दिशा में एक बड़ा क़दम बताया। कार्यक्रम में शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने भाग लिया।
— भारत एक्सप्रेस
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