भरूच (गुजरात) । मुस्लिम राष्ट्रीय मंच (MRM) गुजरात प्रदेश द्वारा भरूच में आयोजित एक भव्य सम्मान समारोह में पूरे गुजरात के मुस्लिम समाज के होनहार छात्रों और समाज में विशिष्ट योगदान देने वाली शख्सि़यतों को ट्रॉफ़ी और सम्मान पत्र देकर नवाज़ा गया। इस मौक़े पर मंच के राष्ट्रीय संयोजक एवं राष्ट्रीय अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान आयोग (NCMEI) के कार्यवाहक अध्यक्ष प्रोफ़ेसर (डॉ.) शाहिद अख्त़र ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि तालीम ही वह ज़रिया है जिसके ज़रिए आप मुकम्मल कामयाबी हासिल कर सकते हैं।
कार्यक्रम की शुरुआत क़ुरआन-ए-पाक की तिलावत से हुई, जिसके बाद मंच के पदाधिकारियों ने मेधावी छात्रों का परिचय कराया। गुजरात के विभिन्न ज़िलों से आए छात्रों और समाजसेवियों को मंच पर बुलाकर उनकी कामयाबी के सफ़र को सलाम किया गया। समारोह में बड़ी तादाद में मौजूद लोगों ने जब छात्रों को सम्मानित होते देखा तो पूरा हॉल ‘तालीम-ओ-तहज़ीब’ के नारों से गूंज उठा।
🔹 गुजरात के कोने-कोने से आए मेधावी छात्र हुए सम्मानित
🔹 ‘आप राष्ट्रपति बनें, प्रधानमंत्री बनें, डॉ. कलाम बनें’ — प्रो. अख़्तर का छात्रों को संबोधन
🔹 तालीम, तरक़्क़ी, तहज़ीब : MRM का वो मिशन जो बदल रहा है तस्वीर
🔹 दीनी और दुनियावी तालीम का संगम ही बनाता है मुकम्मल इंसान
🔹 हुब्बुल वतनी निस्फ़ुल ईमान : वतन से मुहब्बत की तालीम भी है ज़रूरी
”तुम ही हो आने वाले भारत का कल”
अपने संबोधन में प्रो. शाहिद अख्त़र ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा, “मैं चाहता हूँ कि आने वाले दिनों में आप इतना कामयाब हो कि इस देश का आप राष्ट्रपति बनें, प्राइम मिनिस्टर बनें और डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम बनें।” उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि सपने वह नहीं होते जो दिन में देखे जाते हैं, सपना वह होता है जो रात को आपको सोने न दे।
प्रो. अख्त़र ने छात्रों को डॉ. कलाम के जीवन से सबक़ लेने की नसीहत दी। उन्होंने कहा कि एक छोटे से गाँव से निकलकर डॉ. कलाम देश के सबसे बड़े संवैधानिक पद तक पहुंचे—यह तालीम की ताक़त थी। उन्होंने कहा कि तालीम के साथ-साथ किरदार भी अहम है। “डॉ. कलाम किसी हिंदू, मुसलमान, सिख, ईसाई, किसी ज़ात और धर्म के नाम से नहीं जाने जाते थे। वह हर हिंदुस्तानी के दिलों में बसने वाले राष्ट्रपति थे।”
”छोटा सोचने से कभी बड़ा नहीं हो सकते”
प्रो. अख्त़र ने छात्रों से आग्रह किया कि वे अपने मिशन को बड़ा रखें। “छोटा सोचने से आप कभी बड़े नहीं हो सकते हैं,” उन्होंने कहा और मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के तीन मुख्य स्तंभों—तालीम, तरक़्क़ी, तहज़ीब—का ज़िक्र किया। उन्होंने बताया कि दीनी तालीम इंसान को बेहतर इंसान बनाती है और दुनियावी तालीम तरक़्क़ी और ख़ुशहाली का रास्ता दिखाती है—दोनों ज़रूरी हैं।
उन्होंने छात्रों को उनकी ज़िम्मेदारियां भी याद दिलाईं—माँ-बाप के सपनों को पूरा करने की, अपने ज़िले और अपने देश के प्रति ज़िम्मेदारी की। “मां-बाप का जो सीना है, वह फ़ख़्र से चौड़ा होना चाहिए,” उन्होंने कहा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “विकसित भारत 2047” के सपने का भी ज़िक्र किया। “इसको पूरा करने की ज़िम्मेदारी आपके कंधों पर है,” उन्होंने छात्रों से कहा।

”हुब्बुल वतनी निस्फ़ुल ईमान”
प्रो. अख्त़र ने अपने संबोधन में हुब्बुल वतनी (वतन से मुहब्बत) पर भी ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि इस्लाम हमें सिखाता है—“हुब्बुल वतनी निस्फ़ुल ईमान” (वतन से मुहब्बत ईमान का आधा हिस्सा है)। उन्होंने कहा कि ज़रूरत पड़ने पर मुल्क की हिफ़ाज़त के लिए क़ुर्बानी देने के लिए भी तैयार रहना चाहिए।
उन्होंने छात्रों को रचनात्मक सोच (कंस्ट्रक्टिव थिंकिंग) अपनाने की भी ताकीद की और कहा कि अगर आपकी सोच अच्छी है, आपने तालीम को चुना है तो तरक़्क़ी और ख़ुशहाली से आपको कोई नहीं रोक सकता।
कार्यक्रम की सराहना
समारोह के आयोजन के लिए गुजरात प्रदेश मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के संयोजक सलीम पठान और उनकी पूरी टीम को भी ज़बरदस्त मुबारकबाद दी गई। प्रो. अख्त़र ने कार्यक्रम के सफ़ल आयोजन के लिए सलीम पठान और मंच की पूरी यूनिट की तारीफ़ की।
इस अवसर पर उन्होंने सभी छात्रों के मुस्तक़बिल (भविष्य) के लिए दुआ भी की—“मे अल्लाह ताला ब्लेस यू इमेन्सली।”
क्या है मुस्लिम राष्ट्रीय मंच?
ग़ौरतलब है कि मुस्लिम राष्ट्रीय मंच एक सामाजिक संगठन है जो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से प्रेरणा लेता है और विशेष रूप से मुस्लिम समाज में संवाद, समरसता और राष्ट्रभक्ति की भावना को बढ़ावा देने का काम करता है。 इसके संरक्षक (मार्गदर्शक) डॉ. इन्द्रेश कुमार हैं, जो RSS के राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य भी हैं। मंच की स्थापना वर्ष 2002 में हुई थी और इसका उद्देश्य हिंदू-मुस्लिम समाज के बीच भाईचारे और सद्भाव को मज़बूत करना है।
मंच “तालीम, तहज़ीब और तरक़्क़ी” को अपने तीन मुख्य स्तंभ मानता है और इसे समाज के हर वर्ग तक पहुंचाने का संकल्प रखता है। प्रो. शाहिद अख्त़र पहले भी कह चुके हैं कि “तालीम, तहज़ीब और तरक़्क़ी ही नफ़रत और हिंसा का असली जवाब है।”

आने वाले कल की तस्वीर
इस सम्मान समारोह ने एक साफ़ पैग़ाम दिया—मुस्लिम समाज के नौजवान देश के विकास में अपनी पूरी ताक़त लगाने को तैयार हैं। प्रो. अख्त़र के शब्दों में, “आप बच्चे आने वाले भारत का कल हैं। इस देश का फ़्यूचर आपके कंधों पर है और आपको उस ज़िम्मेदारी को समझना होगा।”
कार्यक्रम के अंत में सभी सम्मानित छात्रों ने तालीम को अपना मिशन बनाने और विकसित भारत के सपने को साकार करने का संकल्प लिया। मंच के पदाधिकारियों ने आश्वासन दिया कि आने वाले दिनों में भी ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहेंगे, ताकि मुस्लिम समाज के होनहार बच्चों को मंच मिलता रहे और वे अपने हुनर और तालीम के बल पर देश का नाम रोशन कर सकें।
—- भारत एक्सप्रेस
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