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Strait of Hormuz

Indian ship cross strait of hormuz: अमेरिका-ईरान तनाव कम होने के बाद यूरिया, DAP और सल्फर से लदे 4 कार्गो जहाज सफलतापूर्वक होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर भारत की ओर बढ़ रहे हैं. खरीफ सीजन से पहले देश का उर्वरक भंडार रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है.

ईरान-अमेरिका तनाव फिर बढ़ने की आशंका के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य पर संकट गहराता दिख रहा है. यदि यह रणनीतिक मार्ग बाधित हुआ तो भारत समेत दुनिया भर में तेल-गैस आपूर्ति और महंगाई पर बड़ा असर पड़ सकता है...

ईरान-अमेरिका शांति समझौते के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही फिर शुरू हो रही है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार को राहत मिली है. कतर ने LNG उत्पादन तेजी से बढ़ाने की योजना बनाई है, जिससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा और गैस आपूर्ति को बड़ा फायदा मिल सकता है...

अमेरिका और ईरान के बीच ऐतिहासिक शांति समझौता हो गया है, जिसका ऐलान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने किया है. इस डील के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य से अमेरिकी नौसेना की नाकाबंदी तुरंत हटा ली जाएगी और बिना किसी टैक्स के अंतरराष्ट्रीय तेल आपूर्ति बहाल होगी.

ओमान तट के पास लगातार जहाजों पर हुए हमलों के बाद भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा हो गई है. भारत ने अमेरिकी राजनयिक को तलब कर कड़ा विरोध दर्ज कराया है और लापता भारतीयों की खोज तेज कर दी गई है...

WORLD NEWS: होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान की खतरनाक नौसैनिक माइंस की तस्वीरें सामने आई हैं, जिन्हें अमेरिकी नौसेना अब तक ढूंढ नहीं पाई थी.

US-Iran deal: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने के लिए एक संभावित शुरुआती समझौते का मसौदा सामने आया है. इसमें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने और सैन्य तैनाती घटाने जैसे प्रस्ताव शामिल हैं.

ब्रोकरेज फर्म 'कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज' का कहना है कि भारत में पेट्रोल प्राइस की हालिया ₹3 की बढ़ोतरी नाकाफी है. तेल कंपनियों के घाटे की भरपाई के लिए पेट्रोल-डीजल ₹17 तक और महंगे हो सकते हैं.

Iran द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में नए नियंत्रण और टोल नियम लागू करने के दावों ने वैश्विक तनाव बढ़ा दिया है. अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते टकराव से दुनिया की तेल सप्लाई और वैश्विक बाजारों पर संकट गहराने की आशंका जताई जा रही है...

भारत की विदेश नीति में ईरान के साथ संबंध हमेशा अमेरिकी प्रतिबंधों और रणनीतिक स्वायत्तता के बीच झूलते रहे हैं. यदि भारत ने प्रतिबंधों की परवाह किए बिना चाबहार बंदरगाह और उससे जुड़े रेल-रोड नेटवर्क का तेजी से विकास किया होता.