₹3 की बढ़ोतरी के बाद भी पेट्रोल-डीजल के दाम ₹17 तक बढ़ाने की जरूरत, कोटक की रिपोर्ट में बड़ा दावा
देश में पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों से परेशान आम जनता को आने वाले दिनों में और बड़ा झटका लग सकता है. हाल ही में तेल कंपनियों द्वारा ईंधन के दामों में की गई ₹3 प्रति लीटर की बढ़ोतरी को ब्रोकरेज फर्म ‘कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज’ ने नाकाफी बताया है. कोटक की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की ऊंची कीमतों के कारण भारतीय तेल कंपनियों का नुकसान पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है. तेल कंपनियों के घाटे (अंडर-रिकवरी) की भरपाई के लिए पेट्रोल और डीजल के दामों में अभी ₹13 से लेकर ₹17 प्रति लीटर तक की और अतिरिक्त बढ़ोतरी करने की जरूरत पड़ सकती है.
₹3 की बढ़ोतरी क्यों नाकाफी साबित?
पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव और ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ (Strait of Hormuz) रूट पर सप्लाई में आ रही रुकावटों के कारण वैश्विक बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल के दाम $105 से $120 प्रति बैरल के आसपास पहुंच गए हैं. दबाव बढ़ने के कारण तेल विपणन कंपनियों (OMCs) ने 15 मई को करीब चार साल के लंबे अंतराल के बाद पेट्रोल-डीजल की कीमतों में ₹3 प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी, जिसके बाद 19 मई को भी करीब 90 पैसे की एक और वृद्धि की गई.
इसके बावजूद कोटक की रिपोर्ट कहती है कि सरकारी तेल कंपनियों को फिलहाल हर महीने लगभग ₹25,000 करोड़ (₹250-260 बिलियन) का भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है. इस समय कंपनियों को डीजल पर करीब ₹11.40 प्रति लीटर और पेट्रोल पर ₹14.30 प्रति लीटर की अंडर-रिकवरी हो रही है.

कोटक ने समझाए अलग-अलग गणित
कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज ने अलग-अलग परिस्थितियों के आधार पर ईंधन की कीमतों में जरूरी बढ़ोतरी के कुछ कड़े अनुमान (सिनैरियो) पेश किए हैं:
एक्सपोर्ट पैरिटी और विंडफॉल टैक्स: यदि सरकार के टैक्स और निर्यात के नियमों को ध्यान में रखें, तो नुकसान की भरपाई के लिए डीजल में ₹13.4 प्रति लीटर और पेट्रोल में ₹17.1 प्रति लीटर की तुरंत बढ़ोतरी जरूरी है.
नॉर्मेटिव रिफाइनिंग मार्जिन: अगर तेल कंपनियां अपना तय मुनाफा (मार्जिन) बनाए रखना चाहती हैं, तो डीजल की कीमतों को ₹24.7 और पेट्रोल को ₹20.5 प्रति लीटर तक महंगा करना होगा.
ट्रेड पैरिटी प्राइसिंग: सबसे खराब स्थिति में यदि घाटे को पूरी तरह वसूलना हो, तो डीजल में ₹37.9 और पेट्रोल में ₹28.9 प्रति लीटर तक के बड़े उछाल की जरूरत पड़ सकती है.

तेल कंपनियों के घाटे और ईंधन का मौजूदा हाल
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के उछाल से भारत के महानगरों में पेट्रोल और डीजल के दाम पहले ही आसमान छू रहे हैं. नीचे दी गई टेबल से तेल कंपनियों के मौजूदा संकट और अलग-अलग शहरों में ईंधन की मौजूदा दरों को आसानी से समझा जा सकता है:
शहर / मौजूदा कीमत (₹ प्रति लीटर) / कोटक के अनुसार जरूरी अतिरिक्त बढ़ोतरी
पेट्रोल (नई दिल्ली) ₹98.64 ₹13.4 से ₹17.1 तक
डीजल (नई दिल्ली) ₹91.58 ₹13.4 से ₹17.1 तक
पेट्रोल (मुंबई) ₹107.59 —
डीजल (मुंबई) ₹94.08 —
तेल कंपनियों का मासिक घाटा लगभग ₹25,000 करोड़.
हालांकि, सरकार ने घरेलू रिफाइनरियों को राहत देने के लिए विंडफॉल टैक्स (Windfall Tax) में कुछ बदलाव किए हैं. डीजल के निर्यात पर लगने वाले टैक्स को ₹23 से घटाकर ₹16.5 प्रति लीटर और एटीएफ (हवाई ईंधन) पर इसे ₹33 से घटाकर ₹16 प्रति लीटर कर दिया गया है, जबकि पेट्रोल के निर्यात पर ₹3 प्रति लीटर का टैक्स लगाया गया है. जानकारों का मानना है कि यदि वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें जल्द नहीं घटीं, तो आम उपभोक्ताओं की जेब पर इसका सीधा असर पड़ना तय है.
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