महीने की पहली तारीख (1 जून) आम आदमी के लिए महंगाई का एक नया और बड़ा झटका लेकर आई है. तेल कंपनियों ने 19 किलो वाले कमर्शियल एलपीजी (Commercial LPG) गैस सिलेंडर के दाम एक बार फिर से बढ़ा दिए हैं. हालांकि, राहत की बात सिर्फ इतनी है कि 14.2 किलो वाले घरेलू रसोई गैस सिलेंडरों की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है. लेकिन कमर्शियल गैस का महंगा होना इस बात की पक्की गारंटी है कि अब आपका बाहर खाना, रेस्टोरेंट का बिल और सड़क किनारे चाय-समोसे का मजा आपकी जेब पर भारी पड़ने वाला है.
दिल्ली-कोलकाता में आग उगल रहे दाम
ताजा बढ़ोतरी के बाद महानगरों में गैस के दाम आसमान छूने लगे हैं. दिल्ली में 19 किलो के कमर्शियल सिलेंडर की कीमत 42 रुपये की छलांग लगाकर अब 3,113.50 रुपये हो गई है. वहीं कोलकाता में तो हालात और भी डराने वाले हैं, यहां 53.50 रुपये की वृद्धि के साथ सिलेंडर का दाम 3,255.50 रुपये पर पहुंच गया है. फरवरी के अंत से लेकर अब तक यह लगातार चौथी बार है जब कमर्शियल सिलेंडर के दाम बढ़ाए गए हैं (मई में तो सीधे 993 रुपये की आग लगी थी).
मजदूरों की रोटी पर ‘छोटू’ गैस का प्रहार
महंगाई की यह मार सिर्फ बड़े होटलों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सबसे बुरा असर शहरों में रहने वाले गरीब मजदूरों और छात्रों पर पड़ रहा है. 5 किलो वाले फ्री ट्रेड एलपीजी (FTL) यानी ‘छोटू’ सिलेंडर के दाम भी 11 रुपये बढ़ा दिए गए हैं, जिसके बाद दिल्ली में इसकी कीमत 821.50 रुपये हो गई है. प्रवासी मजदूर जिनके पास लोकल एड्रेस प्रूफ नहीं होता, वे पूरी तरह इन्हीं छोटे सिलेंडरों पर निर्भर होते हैं. अप्रैल और मई के बाद इस ‘छोटू’ सिलेंडर पर यह लगातार तीसरी बढ़ोतरी है.
आखिर क्यों बार-बार सुलग रही है LPG?
आप सोच रहे होंगे कि आखिर ये कीमतें इतनी तेजी से क्यों बढ़ रही हैं? इसका सीधा कनेक्शन अंतरराष्ट्रीय बाजार और जियो-पॉलिटिक्स से है. दरअसल, ‘ईरान संकट’ के कारण ग्लोबल मार्केट में गैस के दाम लगातार बढ़ रहे हैं. इसके अलावा माल ढुलाई (Freight) और डॉलर के मुकाबले रुपये की चाल भी इसका बड़ा कारण है. ऊपर से सरकार ने ईंधन की सुरक्षा (Fuel Security) सुनिश्चित करने के लिए तेल कंपनियों को कम से कम 30 दिन का एलपीजी भंडार (Reserve) रखने का सख्त निर्देश दिया है, जिसका दबाव भी कीमतों पर दिख रहा है.
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आप पर क्या होगा सीधा असर?
भले ही आपके घर के किचन का बजट सीधे तौर पर न बिगड़ा हो, लेकिन अप्रत्यक्ष रूप (Indirectly) से इसका पूरा बोझ आपकी ही जेब पर आएगा. होटल, रेस्टोरेंट, बेकरी और छोटे खाने-पीने के स्टॉल मुख्य रूप से कमर्शियल सिलेंडरों का ही इस्तेमाल करते हैं. गैस महंगी होने का सीधा मतलब है कि अब आपकी पसंदीदा डिश, बाहर का खाना, और यहां तक कि टिफिन सर्विस की थाली के लिए भी आपको अपनी जेब ज्यादा ढीली करनी पड़ेगी!
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