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Gold Silver Price Today: मिडिल ईस्ट में जंग की आग, फिर भी क्यों ठंडा पड़ रहा सोना? जानिए बाजार का ये ‘उल्टा’ गणित

आमतौर पर युद्ध के समय सोने के दाम बढ़ते हैं, लेकिन मौजूदा हालात में 24 कैरेट सोना ₹1,62,800 और चांदी ₹2,84,900 के स्तर पर संघर्ष कर रही है. विशेषज्ञों के अनुसार, डॉलर की मजबूती और निवेशकों द्वारा बड़े पैमाने पर की गई मुनाफावसूली ने कीमतों पर दबाव बनाया है.

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Gold Silver Price Today: आम तौर पर जब भी दुनिया के किसी कोने में युद्ध के नगाड़े बजते हैं, तो निवेशक डर के मारे अपना पैसा सुरक्षित जगहों पर लगाने लगते हैं. ऐसी स्थिति में ‘गोल्ड’ यानी सोना सबसे पहली पसंद होता है, जिसके कारण इसकी कीमतें रॉकेट की तरह ऊपर भागती हैं. लेकिन इस बार मिडिल ईस्ट (इजरायल, ईरान और अमेरिका) के बीच बढ़ते तनाव के बावजूद भारतीय सर्राफा बाजार से जो खबरें आ रही हैं, उन्होंने सबको हैरत में डाल दिया है. लोग पूछ रहे हैं कि जब चारों तरफ बारूद की गंध है, तो सोने-चांदी के दाम गिर क्यों रहे हैं?

क्या है आज का ताजा हाल?

अगर आज यानी शुक्रवार के भाव पर नजर डालें, तो भारतीय बाजार में हलचल साफ दिख रही है. कल की भारी उठापटक के बाद आज 24 कैरेट सोने का भाव ₹1,62,800 प्रति 10 ग्राम के इर्द-गिर्द घूम रहा है. कल के मुकाबले इसमें मामूली गिरावट दर्ज की गई है.

वहीं, चांदी की बात करें तो ये ₹2,84,900 प्रति किलो पर ट्रेड कर रही है. ये आंकड़े चौकाने वाले इसलिए हैं क्योंकि युद्ध के माहौल में जनता को लग रहा था कि कीमतें ₹2 लाख की तरफ भागेंगी, पर यहाँ तो ग्राफ नीचे की तरफ झुकता दिख रहा है.

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क्यों हो रही है ये ‘उल्टा’ चाल?

इस पहेली का जवाब ‘प्रॉफिट बुकिंग’ में छिपा है. बाजार के जानकारों का कहना है कि युद्ध की आशंका में सोने के दाम पहले ही काफी ज्यादा बढ़ चुके थे. जब कीमतें अपने रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचीं, तो बड़े खिलाड़ियों और निवेशकों ने सोचा कि यही सही मौका है अपना मुनाफा पक्का करने का. उन्होंने बड़े पैमाने पर सोना बेचना शुरू कर दिया ताकि हाथ में कैश आ सके. इसी बिकवाली का असर गोल्ड और सिल्वर ETF पर भी पड़ा, जहां देखते ही देखते 4% से 8% तक की गिरावट दर्ज की गई.

डॉलर और फेड रिजर्व का ‘डबल अटैक’

सिर्फ युद्ध ही नहीं, बल्कि सात समंदर पार अमेरिका से आने वाली खबरें भी आग में घी डाल रही हैं. अमेरिकी डॉलर की मजबूती और वहां के फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों को लेकर लिए जा रहे फैसलों ने निवेशकों को कंफ्यूज कर दिया है. कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भी बाजार को अस्थिर बना रही हैं.

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-भारत एक्सप्रेस



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