Zero Tax on 20 Lakh Salary: अक्सर माना जाता है कि नई टैक्स रिजीम (New Tax Regime) में 80C जैसी छूट न होने के कारण टैक्स बचाना नामुमकिन है. लेकिन असलियत इसके उलट है. अगर आप एक सैलरीड प्रोफेशनल हैं और आपकी सालाना आय 20 लाख रुपए है तो आपको आमतौर पर 1 लाख रुपये से ज्यादा टैक्स देना पड़ता है. मगर सही फाइनेंशियल प्लानिंग और सैलरी स्ट्रक्चर में छोटे बदलावों के जरिए आप इस टैक्स को पूरी तरह ‘जीरो’ कर सकते हैं. आइए जानते हैं क्या है वो गणित जो आपकी जेब भारी रखेगा.
सैलरी स्ट्रक्चर ही है असली ‘गेम चेंजर’ (New Tax Regime)
नई रिजीम में टैक्स बचत अब निवेश के बजाय इस बात पर टिकी है कि आपकी कंपनी आपको पैसे किस रूप में दे रही है. अगर आपका कुल पैकेज (CTC) ₹20 लाख है और उसमें 50% यानी ₹10 लाख बेसिक सैलरी है, तो आप इसे स्मार्टली डिजाइन करवा सकते हैं. इसमें कंपनी की तरफ से मिलने वाला EPF योगदान (बेसिक का 12% – करीब 1.2 लाख) और NPS (80CCD(2)) के तहत कंपनी का 14% योगदान (करीब 1.4 लाख) आपकी टैक्सेबल इनकम को सीधे कम कर देता है.
कार लीज और मील बेनिफिट्स का जादू
टैक्स (New Tax Regime India) बचाने का सबसे बड़ा हथियार है कार लीज. यदि आप 8 लाख रुपए की कार 2 साल के लिए कंपनी के जरिए लीज पर लेते हैं तो सालाना करीब 4.23 लाख रुपये का खर्च आपकी सैलरी के टैक्स-फ्री हिस्से में चला जाता है. इसके अलावा, मील कूपन (Meal Benefits) के जरिए आप सालाना लगभग 1.05 लाख रुपये बचा सकते हैं. अगर आपके पास अपनी कार है, तो फ्यूल और ड्राइवर के खर्च को भी कंपनी से ‘पर्क्विजिट’ के रूप में क्लेम करके टैक्स छूट पाई जा सकती है.
कैसे होगा टैक्स ‘जीरो’? समझिए पूरा गणित
इन सभी स्मार्ट बेनिफिट्स को मिलाने के बाद आपकी नेट इनकम करीब 12.11 लाख रुपये रह जाती है. इसमें ₹75,000 का स्टैंडर्ड डिडक्शन घटाने के बाद आपकी टैक्सेबल इनकम लगभग 11.36 लाख रुपये के दायरे में आ जाएगी. नई रिजीम के नियमों और मिलने वाली टैक्स रिबेट (Rebate) के कारण, इस स्तर पर आपका प्रभावी टैक्स लगभग शून्य हो सकता है. बिना इन बदलावों के, आपको करीब 1.18 लाख रुपये तक का टैक्स भरना पड़ सकता था.
आखिरी समय के निवेश का जमाना गया
विशेषज्ञों के अनुसार, नई टैक्स रिजीम में अब साल के अंत में इंश्योरेंस या FD में निवेश करके टैक्स बचाने की पुरानी रणनीति काम नहीं आती. अब जरूरत है कॉरपोरेट टैक्स प्लानिंग की. कार लीज और कंपनी स्पॉन्सर्ड स्कीमों को अपनाकर आप न केवल टैक्स बचाते हैं बल्कि अपनी ‘इन-हैंड’ सैलरी को भी बढ़ाते हैं. यह फॉर्मूला न केवल कर्मचारी के लिए फायदेमंद है, बल्कि कंपनियों के लिए भी आसान है क्योंकि इससे उन पर कोई अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं पड़ता.
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-भारत एक्सप्रेस
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