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सुल्तानपुर में पकड़ी गई पश्चिम बंगाल भेजी जा रही 178 कछुओं की खेप, तस्करी में शामिल मिले नाबालिग बच्चे, वन विभाग का खुलासा

सुल्तानपुर में वन विभाग ने बड़े पैमाने पर कछुओं की तस्करी का खुलासा किया है, जिन्हें पश्चिम बंगाल भेजा जा रहा था. इन कछुओं को बरामद कर लिया गया है और उन्हें उनके प्राकृतिक आवास में छोड़ने की तैयारी की जा रही है.

Turtles
Aarika Singh Edited by Aarika Singh

सुल्तानपुर से बड़े पैमाने पर प्रतिबंध कछुओं की तस्करी कर पश्चिम बंगाल भेजे जा रहे हैं‌. इसका खुलासा वन विभाग की टीम ने किया है. सुल्तानपुर जिले के चांदा कोतवाली क्षेत्र अंतर्गत कोइरीपुर बाजार के निकट स्थित रेलवे स्टेशन से इन कछुओं को बरामद किया गया है. बोरी में भरकर इन्हें तस्कर के साथ न्यायालय पेश किया गया है. जहां से इनके प्राकृतिक आवास क्षेत्र गोमती नदी में छोड़ने की तैयारी की जा रही है.

सुल्तानपुर से पश्चिम बंगाल के मालदा टाउन जाने वाली गाड़ियों के जरिए कछुओं की तस्करी बड़े पैमाने पर की जा रही है. इसका खुलासा वन विभाग ने किया है. कोइरीपुर के निकट रेलवे स्टेशन से 178 कछुए पकड़े गए हैं. इन कछुओं को बोरी में भरकर मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया है . इसी के साथ पकड़े गए नाबालिक लड़के तस्कर को भी गिरफ्तार करने वाले की समस्त पेश किया गया है. जहां से विधिक कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है. माना जा रहा है कि न्यायालय के आदेश पर पकड़े गए कछुओं को प्राकृतिक आवास गोमती नदी में छोड़ने की कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी.

इसके पूर्व भी हुआ है ऐसा मामला

इसके पूर्व भी मालदा टाउन जाने वाली फरक्का एक्सप्रेस से बड़े पैमाने पर कछुओं की खेप पूर्व में भी बरामद हो चुकी है. राजकीय रेलवे पुलिस और वन विभाग की टीम लंबे समय तक इन तस्करों को निष्क्रिय करने और गिरफ्तार का जेल भेजने की कार्रवाई करती रही है. लेकिन इनकी जड़ को अभी तक खत्म नहीं किया जा सका है. जिसका प्रमाण यह जीता जागता नमूना है. बड़े पैमाने पर अभी भी पशुओं की तस्करी सुनिश्चित की जा रही है.

वन विभाग सुल्तानपुर के रेंजर गौरव सिंह के अनुसार तस्करों से भारी संख्या में कछुए बरामद किए गए है. मुकदमा दर्ज कर विधिक कारवाई की गई है.

दवा बनाने के लिए होता है उपयोग

कछुए की तस्करी बड़े पैमाने पर होने के पीछे कई वजह है. दवा बनाने के लिए कछुआ का उपयोग किया जाता है. यौन शक्ति बढ़ाने वाली दवा भी कछुए से बनाई जाती है. कई जगह पर कछुआ को भाग्य का प्रतीक माना जाता है. ऐसे में लोग पालतू जानवरक तौर पर कछुआ को रखते है. कई इलाकों में कछुआ का मांस भी खाया जाता है.


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-भारत एक्सप्रेस



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