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‘अब माता-पिता के पास जाना चाहती हूं’… 19 वर्षीय युवती के बयान पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला

Prayagraj News: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैसला दिया है कि बालिग व्यक्ति को अपनी मर्जी से रहने का अधिकार है. स्वेच्छा से युवक के साथ रहने के बाद युवती ने माता-पिता के पास लौटने की इच्छा जताई, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया.

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बालिगों की व्यक्तिगत स्वतंत्रता और रहने की आजादी पर अहम फैसला सुनाया.

-इलाहाबाद हाईकोर्ट

Edited by Shubhra Rai

Prayagraj News: इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण याचिका पर सुनवाई करते हुए फैसला सुनाया कि वयस्क नागरिक को अपनी पसंद के व्यक्ति के साथ और अपनी मनपसंद जगह पर रहने की पूर्ण स्वतंत्रता है.

प्रयागराज के मऊ आइमा थाना क्षेत्र की एक 19 वर्षीय युवती द्वारा स्वेच्छा से मोहम्मद इमरान के साथ रहने और बाद में अपने माता-पिता के पास लौटने की इच्छा जताने पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आदेश पारित किया. कोर्ट ने कहा कि बालिग होने के नाते युवती को अपने फैसले लेने का पूरा अधिकार है और उसे उसके माता-पिता की सुपुर्दगी में भेजने का आदेश दिया.

व्यक्ति को अपनी पसंद के साथ रहने का पूर्ण अधिकार

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर बड़ा फैसला देते हुए स्पष्ट किया है कि कानूनन प्रत्येक बालिग व्यक्ति को अपनी इच्छा के अनुसार किसी भी व्यक्ति के साथ रहने और अपना स्थान चुनने का अधिकार है. न्यायमूर्ति संदीप जैन की पीठ ने यह फैसला मऊ आइमा (प्रयागराज) से जुड़े एक बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका (Habeas Corpus Petition) की सुनवाई के दौरान दिया.

गुमशुदगी से हाईकोर्ट तक मामला

मामले के अनुसार, 21 जून 2026 को प्रयागराज के थाना मऊ आइमा में मनोरमा देवी की गुमशुदगी दर्ज कराई गई थी, जो बाद में 4 अगस्त 2026 को भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 86 और 351(3) के तहत प्राथमिकी (FIR) में तब्दील हो गई. युवती के पिता रवि शंकर ने याचिका दाखिल कर आरोप लगाया था कि उनकी बेटी को विपक्षी मोहम्मद इमरान बहला-फुसलाकर ले गया है. पुलिस ने छानबीन कर आरोपी का ठिकाना थाणे वेस्ट (मुंबई) में खोज निकाला और युवती को अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया.

अदालत में युवती का बयान और फैसला

कोर्ट के समक्ष पेश होने पर 19 वर्षीय युवती ने स्पष्ट किया कि वह अपनी मर्जी से मोहम्मद इमरान के साथ गई थी और लगभग दो महीने उसके साथ रही. हालांकि, उसने अदालत में अपनी गलती स्वीकार करते हुए अब अपने माता-पिता के पास ही वापस लौटने की इच्छा व्यक्त की. पिता द्वारा भी बेटी की अभिरक्षा मांगने और युवती की सहमति को देखते हुए अदालत ने याचिका स्वीकार कर ली और उसे माता-पिता के साथ जाने की अनुमति प्रदान की.

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-भारत एक्सप्रेस



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