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गैंगस्टर एक्ट की केस कार्रवाई रद्द, कोर्ट ने कहा यह पैसे व समय की बर्बादी के अलावा कुछ नहीं

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा कि जब मूल आपराधिक मामले में आरोपी बरी हो चुके हैं, तो उसी आधार पर दर्ज गैंगस्टर एक्ट की कार्यवाही जारी नहीं रखी जा सकती. कोर्ट ने संभल के सात आरोपियों को राहत देते हुए गैंगस्टर एक्ट का मुकदमा रद्द कर दिया.

Allahabad High Court

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि मूल आपराधिक केस में बरी आरोपी के खिलाफ उसी केस के आधार पर दर्ज गैंगस्टर एक्ट के तहत केस कार्रवाई भी समाप्त हो जायेगी. कोर्ट ने कहा जब गैंगस्टर एक्ट लगाने का आधार ही खत्म हो गया तो उसकी कार्यवाही जारी रखने का औचित्य नहीं है.

सातों आरोपियों को दी बड़ी राहत

कोर्ट ने संभल के जौहर अली और छः अन्य गैंगस्टर एक्ट के आरोपियों बड़ी को राहत दी है, इनके खिलाफ गैंगस्टर एक्ट की कार्रवाई रद्द कर दी है. संभल के नखास थाने में आरोपियों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट की कार्रवाई सिर्फ एक आपराधिक मामले (क्राइम नंबर 391/2019, आईपीसी के तहत) को आधार बनाकर शुरू की गई थी. आधार मामले (क्राइम नंबर 391/2019) में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, संभल ने आरोपियों को बरी कर दिया.

ऐसे में आरोपियों ने गैंगस्टर एक्ट के मुकदमे से मुक्ति के लिए विशेष अदालत गैंगस्टर में आवेदन दिया, लेकिन अदालत ने इसे खारिज कर दिया. उसका कहना था कि बरी होने का सबूत केस रिकॉर्ड का हिस्सा नहीं है, इसलिए उसे देखा नहीं जा सकता. आरोपियों ने इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी.

विशेष अदालत का आदेश रद्द

न्यायमूर्ति राजीव मिश्रा ने याचिका स्वीकार करते हुए विशेष अदालत के आदेश को रद्द कर दिया. हाईकोर्ट ने कहा गैंगस्टर एक्ट की कार्रवाई का एकमात्र आधार (मामला नंबर 391/2019) अब खत्म हो गया है क्योंकि आरोपी उसमें बरी हो चुके हैं. ऐसे में गैंगस्टर एक्ट के तहत मुकदमा चलाना न्यायसंगत नहीं है.

विशेष अदालत को बरी होने के सबूतों पर विचार करना चाहिए था, क्योंकि वे विश्वसनीय थे. हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट और अपने पुराने फैसलों (प्रीतम सिंह बनाम पंजाब राज्य, सरताज बनाम यूपी राज्य) का हवाला दिया, जिनमें यही सिद्धांत बताया गया है. हाईकोर्ट ने संभल की विशेष अदालत में चल रहा गैंगस्टर एक्ट का मुकदमा (स्पेशल सेशन ट्रायल नंबर 254/2021) पूरी तरह से रद्द कर दिया है. इससे सातों आरोपी इस कानून के तहत चल रही कार्रवाई से मुक्त हो गए हैं. अदालत ने कहा कि आधार खत्म होने के बाद मुकदमा चलाना सिर्फ समय और पैसे की बर्बादी होगी.


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