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परिस्थितियां नियंत्रण में नहीं तो ड्यूटी पर न आने के कारण बर्खास्तगी उचित नहीं -हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि अगर कर्मचारी ऐसे कारणों से ड्यूटी पर नहीं आ सका जो उसके नियंत्रण से बाहर थे, जैसे न्यायिक हिरासत, तो उसे कदाचार का दोषी नहीं ठहराया जा सकता.

Allahabad High Court

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि यदि कोई कर्मचारी ऐसी परिस्थितियों के कारण ड्यूटी पर उपस्थित नहीं हो पाता है जो उसके नियंत्रण से बाहर थीं, तो उसे कदाचार का दोषी नहीं ठहराया जा सकता.

कोर्ट ने लंबे समय तक ड्यूटी न करने के आरोपी आगरा जिला सहकारी बैंक लिमिटेड के एक कर्मचारी, विनोद कुमार मिश्र की बर्खास्तगी को रद्द करते हुए तत्काल सेवा में बहाल करने का आदेश दिया है,.साथ ही बकाया वेतन का पचास फीसदी भुगतान करने का भी निर्देश दिया है.

याची आगरा जिला सहकारी बैंक लिमिटेड में क्लर्क-सह-कैशियर के पद पर कार्यरत थे, को 5 सितंबर, 2021 को हिमाचल प्रदेश के कुल्लू में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) द्वारा नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट, 1985 (एनडीपीएस एक्ट) के तहत गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था और 28 जून, 2024 को बरी होने तक वह जेल में रहे.

न्यायालय ने माना हालात नियंत्रण से बाहर थे

इस अवधि के दौरान, बैंक अधिकारियों ने उनकी अनुपस्थिति को अनधिकृत मानते हुए उनके खिलाफ अनुशासनात्मक विभागीय कार्यवाही शुरू की. उन्हें ड्यूटी पर लौटने के लिए कई नोटिस भेजे गए और विभागीय जांच में भाग लेने के लिए भी कहा गया, लेकिन चूंकि वह जेल में थे, इसलिए वे उपस्थित नहीं हो पाए. बैंक ने उनके आवासीय पते पर नोटिस भेजे, जबकि उनके परिवार ने बैंक को उनकी गिरफ्तारी की सूचना दे दी थी. बैंक ने 28 दिसंबर, 2023 को याची को सेवा से बर्खास्त कर दिया.

न्यायमूर्ति जे.जे. मुनीर की एकलपीठ ने कहा कि बैंक अधिकारियों को याची मिश्र की गिरफ्तारी और कारावास की जानकारी थी, लेकिन उन्होंने जानबूझकर इस तथ्य की अनदेखी की. न्यायालय ने इस बात पर जोर दिया कि यदि कोई कर्मचारी ऐसी स्थिति में है जहां वह नोटिस प्राप्त करने या अपनी रक्षा करने में असमर्थ है, तो उसे अवसर देना वैध नहीं माना जा सकता.

न्यायालय ने सुप्रीम कोर्ट के “कृष्णाकांत बी. परमार बनाम यूनियन ऑफ इंडिया” मामले का भी हवाला दिया, जिसमें यह माना गया था कि अनाधिकृत अनुपस्थिति को कदाचार तभी माना जा सकता है जब यह जानबूझकर हो और मजबूर करने वाली परिस्थितियों का परिणाम न हो.

मिश्रा के मामले में, उनकी अनुपस्थिति जेल में होने के कारण थी, जिस मामले में उन्हें बाद में बरी कर दिया गया. विशेष न्यायाधीश, कुल्लू ने अपने फैसले में कहा था कि अभियोजन पक्ष मिश्रा के खिलाफ आरोप स्थापित करने में पूरी तरह विफल रहा और “अत्यधिक विसंगतिपूर्ण साक्ष्य” के आधार पर दोषी ठहराना अत्यधिक असुरक्षित होगा.

सेवा में बहाली और बकाया भुगतान का आदेश

अदालत ने कहा कि जिस अवधि के लिए मिश्रा पर अनाधिकृत अनुपस्थिति का आरोप लगाया गया था, उस पूरी अवधि में वह न्यायिक हिरासत में थे, इसलिए वह ड्यूटी पर उपस्थित होने की स्थिति में नहीं थे. न्यायालय ने इसे बैंक अधिकारियों का “अत्यंत विकृत और असंवेदनशील दृष्टिकोण” बताया और इसमें “दुर्भावना” का भी अनुमान लगाया.

उच्च न्यायालय ने 28 दिसंबर, 2023 के बर्खास्तगी आदेश को रद्द कर दिया. न्यायालय ने विनोद कुमार मिश्रा को तत्काल सेवा में बहाल करने और उन्हें सेवा की निरंतरता और वरिष्ठता के परिणामी लाभों के साथ, वर्तमान वेतन का भुगतान करने का निर्देश दिया.

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-भारत एक्सप्रेस 



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