सीबीआई की भ्रष्टाचार निरोधक विशेष अदालत, गाज़ियाबाद ने सोमवार को यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की एसएसआई शाखा, नोएडा में बैंक धोखाधड़ी के एक मामले में चार आरोपियों को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई है. दोषियों में तत्कालीन शाखा प्रबंधक मनोज श्रीवास्तव के अलावा दीपक मल्होत्रा, राज कुमार समंता और राकेश कुमार शामिल हैं. अदालत ने इन सभी को अलग-अलग अवधि की कैद और कुल ₹22 लाख रुपये के आर्थिक दंड की सज़ा सुनाई.
यह मामला 14 दिसंबर 2010 को सीबीआई की एंटी करप्शन ब्रांच, गाज़ियाबाद द्वारा दर्ज किया गया था. आरोप था कि मई 2007 से जून 2009 के बीच यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की नोएडा एसएसआई शाखा में शाखा प्रबंधक रहते हुए मनोज श्रीवास्तव ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए निजी व्यक्तियों दीपक मल्होत्रा (एम/एस गिर्धारीलाल एंड सन्स के प्रोपराइटर), राज कुमार समंता और राकेश कुमार के साथ साजिश रचकर फर्जी और जाली दस्तावेजों के आधार पर ₹40 लाख का कैश क्रेडिट लोन और ₹10 लाख का टर्म लोन स्वीकृत कर बैंक को आर्थिक नुकसान पहुंचाया.
2012 में आरोपियों के खिलाफ दायर किया गया था आरोप पत्र
सितंबर 2012 को इस मामले में चारों आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दायर किया गया था. अदालत ने 15 नवंबर 2018 को आरोप तय किए थे. अब वर्षों चली सुनवाई के बाद 30 जून 2025 को सीबीआई के विशेष न्यायाधीश ने सभी आरोपियों को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई है.
न्यायालय द्वारा सुनाई गई सजा इस प्रकार है:
•दीपक मल्होत्रा को 5 वर्ष की कैद और ₹14 लाख जुर्माना
•मनोज श्रीवास्तव को 3 वर्ष की कैद और ₹3 लाख जुर्माना
•राज कुमार समंता को 3 वर्ष की कैद और ₹2 लाख जुर्माना
•राकेश कुमार को 3 वर्ष की कैद और ₹3 लाख जुर्माना
इस फैसले को बैंकिंग व्यवस्था में पारदर्शिता बनाए रखने और भ्रष्टाचार के खिलाफ एक सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है.
– भारत एक्सप्रेस
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