अर्नव से मिलते हुए मुख्यमंत्री
Uttar Pradesh News: प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) की अगुवाई वाली सरकार में लगातार विकास हो रहा है. खुद मुख्यमंत्री लोगों की समस्याओं को निजी तौर पर सुनते हैं और उन्हें हल करते हैं. सीएम योगी की कोशिश होती है कि वह हर जन सुनवाई में जाएं और लोगों को समस्या को हल करें. ऐसी एक जनसुनवाई 21 जुलाई को राजधानी लखनऊ में आयोजित की गई थी. इस दौरान मुख्यमंत्री से मिलने एक हापुड़ अर्नव गोस्वामी नाम का एक बच्चा भी आया. उसने मुख्यमंत्री से अपने परिवार के आर्थिक हालात के बारे में बताते हुए पढ़ाई में मदद की गुहार लगाई.
बबीता व उनके बेटे अर्नव गोस्वामी ने 21 जुलाई को लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) के जनसुनवाई कार्यक्रम में मुलाकात कर खराब आर्थिक स्थिति की जानकारी देते हुए ज्ञापन सौंपा था. खराब आर्थिक स्थिति के कारण महिला ने बेटे की फीस जमा करने में असमर्थता जताई थी. इस पर सीएम ने निर्देश दिया और उसकी समस्याओं का हल हो गया.
‘सीएम अंकल पैसे नहीं है’
हापुड़ के बाबूगढ़ क्षेत्र के शाहपुर जट्ट गांव की बबीता के साथ उसका 6 साल का बच्चा अर्नव गोस्वामी लखनऊ पहुंचा हुआ था. उसने मुख्यमंत्री को देखते हुए कहा कि सीएम अंकल, पढ़ाई करने के लिए हमारे पास रुपये नहीं हैं, कृपया मेरे स्कूल में कहकर फीस माफ करा दो. बच्चे की मां बबीता ने ज्ञापन सौंपकर सीएम से नौकरी दिलाने की मांग की थी.
पति की मौत के बाद बिगड़े हालात
बबीता ने बताया उसकी शादी बुलंदशहर के रहने वाले हिमांशु गोस्वामी से 2016 में हुई थी. उनका बेटा अर्नव गोस्वामी बाबूगढ़ के एक स्कूल में दूसरी कक्षा में पढ़ाई करता है. साल 2023 में बीमारी के चलते अर्नव के पिता की मौत हो गई थी. इसके बाद उनका परिवार का भरण पोषण तक होना मुश्किल हो गया है.
मुख्यमंत्री के निर्देश से हल हुई समस्या
मामले में मुख्यमंत्री (Chief Minister Yogi Adityanath) ने डीएम को कार्रवाई के निर्देश दिए थे. कल महिला व उनका बेटा जिला मुख्यालय पहुंचे, जहां महिला ने डीएम अभिषेक पांडेय को अपनी पीड़ा सुनाई. पति की मौत के बाद से महिला के सामने परिवार का पालन पोषण करने में आ रही दिक्कतों की जानकारी दी. इस पर डीएम अभिषेक पांडेय ने बच्चे अर्नव की कक्षा 10 में पढ़ाई तक की फीस अभी एडवांस में जमा कराने का निर्णय लिया है.
प्रशासन ने बताया कि स्कूल कक्षा 10 तक आने वाली फीस का विवरण जैसे ही प्रशासन को देगा उसके आधार पर जो भी धनराशि होगी जिला प्रशासन विद्यालय के खाते में जमा करा देगा. महिला के जर्जर घर की मरम्मत के लिए जिला प्रशासन ने तत्काल एक लाख रुपये की सहायता देने का निर्णय लिया है. वहीं एलडीएम को बुलाकर महिला के गांव के आसपास के किसी ग्रामीण बैंक में महिला को संविदा पर नौकरी दिलाने के आदेश दिए. ऐसे में गरीबी के चलते अब अर्नव की पढ़ाई नहीं छूटेगी, उनकी फीस विद्यालय को लगातार जारी रहेगी.
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