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स्वामी विवेकानन्द के भारत ने उतार फेंकी है गुलामी की मानसिकता- डा दिनेश शर्मा

राज्यसभा सांसद और यूपी के पूर्व उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने कहा कि स्वामी विवेकानन्द के विचारों से प्रेरित आज का भारत गुलामी की मानसिकता से बाहर निकल चुका है.

राज्यसभा सांसद एवं यूपी के पूर्व उपमुख्यमंत्री यूपी डा दिनेश शर्मा ने कहा कि स्वामी विवेकानन्द के भारत ने गुलामी की मानसिकता को उतार फेंका है. आज का भारत समर्थ और सशक्त है जो गोली का जवाब गोले से देता है. स्वामी विवेकानन्द कहा करते थे कि खुद को कमजोर समझना सबसे बडा पाप है. आज के भारत ने उनके दिए इस मंत्र को अपना लिया है तथा अब मोदी सरकार पाकिस्तानी गोली का जवाब गोले से देती है और हमारी सेना उनके घर में घुसकर मारती है. पूर्व में आतंकवाद की घटना भारत में होने पर तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने कोई प्रतिकार नहीं करती थी. कांग्रेस की सरकार पकिस्तानी हमलों के जवाब में शांति का प्रतीक सफेद कबूतर उडाया करती थी.

सांप्रदायिकता फैलाने वालों के प्रयास विफल

सांसद ने कहा कि स्वामी विवेकानन्द कहते थे ईश्वर एक है और यही सनातन भी कहता है और ये भारत की आत्मा भी है. यह देश धर्मनिरपेक्ष है और अलग अलग धर्म के लोगों ने देश के प्रमुख पदो को सुशोभित किया है. कुछ लोग सनातन को गाली देकर देश में साम्प्रदायिकता का जहर घोलना चाहते हैं. उनके प्रयास सफल नहीं होने वाले हैं. भारत पर आक्रान्ताओं ने आक्रमण किया तथा देश को लूटा पर यहां की संस्कृति को नष्ट नहीं कर सके. तक्षशिला और नालन्दा को जलाया गया पर देश के विद्वानों ने ग्रन्थों को फिर से लिख दिया. भारत सनातन की मजबूत नींव पर खडा देश है.

ये ऐसा भारत है जहां पर 66 करोड लोग कुंभ का स्नानकर अयोध्या , काशी , चित्रकूट के दर्शन करते हैं और जहां पर पीएम डमरू बजाकर भगवान सोमनाथ की आराधना करते हैं. ये बदलता हुआ भारत है. ये परिवर्तन मोदी और योगी के सनातन की अलख लगाने के कारण ही संभव हुआ है. ये ऐसा सनातन है जो सभी धर्मो का आदर करता है.

आधुनिक भारत और सनातन संस्कृति का मेल

उनका कहना था कि पीएम मोदी एक तरफ युवाओं के साथ ए-आई पर चर्चा करते हैं तो दूसरी ओर डमरू बजाकर भगवान सोमनाथ के शौर्य की यात्रा में शामिल होते हैं. इसके कुछ समय बाद ही बिजनेस समिट में भी शामिल होते हैं. इस क्रम में सीएम योगी प्रयागराज संगम में स्नानकर कानून व्यवस्था की समीक्षा करते हैं. ये दोनेा महामानव की तरह हैं. लम्बी प्रतीक्षा के बाद ऐसा समय आया है जिसमें राम मंदिर का निर्माण हुआ , काशी का कारीडोर बना , गरीब को फ्री मकान मिला, घर घर शौचालय बना , बिजली हर घर को रोशन करने लगी है.

डा शर्मा ने कहा कि मानवता और हिन्दुत्व ही स्वामी विवेकानन्द के जीवन का सार है. अदभुत उद्बोधन क्षमता के धनी स्वामी विवेकानन्द ने हिन्दुत्व को जिया था. वे कहते थे कि अगर ईश्वर को खोजते हो तो उस पर भरोसा भी करना चाहिए. भक्ति के दिखावटी आवरण में रहना उचित नहीं है.

युवाओं के लिए विवेकानन्द का संदेश

उनकी शिक्षा का जिक्र करते हुए डा शर्मा ने कहा कि स्वामी विवेकानन्द गुरु को ही भगवान का स्वरूप मानते थे. उनका कहना था कि शिक्षा स्वास्थ्य और राहत कार्य की दिशा में कार्य होना चाहिए. उन्होंने देश का भ्रमण करने के साथ ही कन्याकुमारी में साधना की थी. उनका कहना था कि उठो जागो और तब तक तक चलो जब तक सफलता हासिल नहीं हो जाती और यही देश के हर युवा के जीवन का मंत्र होना चाहिए. स्वामी जी के विचार जीवन में सफलता की कुंजी हैं. अपने जीवन में मंगलवार के महत्व का जिक्र करते हुए सांसद ने कहा कि बजरंगबली हर श्रद्धालु के जीवन में कृपा बरसाते हैं. रामकृष्ण परमहंस विवेकानन्द के गुरू थे. रामकृष्ण परमहंस महाकाली के उपासक थे और कहा जाता है कि वे मां से साक्षात्कार करा करते थे. वे कहते थे कि भगवान कण कण में व्याप्त है और विवेकानन्द जी ने अपने गुरु से यही ज्ञान प्राप्त किया. परमहंस को जब कैंसर जैसा रोग हुआ उस समय में भी उन्होंने अपनी शक्ति का उपयोग अपने स्वास्थ्य को ठीक करने के लिए नहीं किया था.

विवेकानन्द ने दिखाया संयम का रास्ता

शिकागो धर्म संसद का दृष्टांत देते हुए उन्होंने कहा कि जब स्वामी विवेकानन्द को मंच के नीचे स्थान देने पर आयोजक ने खेद प्रकट किया तो उन्होंने कहा था कि नीचे का स्थान सुरक्षित होता है और यहां से ऊपर जाने की राह आसान है पर अगर ऊपर बैठा व्यक्ति गलत करता है तो फिर नीचे ही आना पडता है. यही जीवन का सत्य भी है. जब वे स्वामी रामकृष्ण परमहंस के पास पहुंचे और बोले कि मुझे आपकी जरूरत है इस पर गुरु ने कहा कि पहले मुझ पर भरोसा करना सीखो. उनकी गुरु के प्रति पूर्ण श्रद्धा थी. उनका कहना था कि अच्छे कर्म के लिए स्वस्थ शरीर का होना जरूरी है. उनके अमेरिका दौरे के समय रेल में महिलाओं द्वारा उन्हे फसाने की घटना बताते हुए उन्होंने कहा कि उस समय में विवेकानन्द जी ने बुद्धि और संयम के साथ अपने विरुद्ध हो रहे षडयंत्र को विफल कर दिया था. इस घटना से सीख मिलती है कि कठिन समय में संयम को नहीं खोना चहिए.

इस अवसर पर सांसद विजय कुमार दुबे, सांसद शशांकमणि त्रिपाठी, पूर्व सांसद राजेश पांडे, जिला अध्यक्ष दुर्गेश राय, सेवानिवृत आईएएस विनोद शंकर चौबे, विधायक असीम कुमार, विवेकानंद पांडे, सुरेंद्र सिंह कुशवाहा, विनय प्रकाश गोंड प्रमुख तौर पर उपस्थित रहे.

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-भारत एक्सप्रेस



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