Ravi Kumar/Rohtas Group Case: निवेशकों की खून-पसीने की कमाई पर कुंडली मारकर बैठे रोहतास ग्रुप पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) का शिकंजा और कस गया है. शुक्रवार को हुई एक बड़ी कार्रवाई में ईडी ने ग्रुप के प्रमोटर दीपक रस्तोगी और उनकी सहयोगी कंपनियों की करीब 350 करोड़ रुपये की संपत्तियों को कुर्क कर लिया है. यह उन हजारों लोगों के लिए इंसाफ की एक उम्मीद है, जिन्होंने अपना घर बसाने के सपने में इस ग्रुप को करोड़ों रुपये सौंप दिए थे.
कागजों पर कीमत कुछ और, बाजार में कुछ और
हैरानी की बात यह है कि जिन 77 चल-अचल संपत्तियों को जब्त किया गया है, उन्हें कागजों पर करीब 158.85 करोड़ रुपये में खरीदा दिखाया गया था. लेकिन आज की तारीख में उनकी असल बाजार वैल्यू 350 करोड़ रुपये से भी ज्यादा है. ईडी की जांच में सामने आया कि ये सारी संपत्तियां लखनऊ के प्राइम लोकेशंस पर स्थित हैं.
इसमें से 141.21 करोड़ रुपये की संपत्ति सीधे तौर पर प्रमोटर दीपक रस्तोगी, वर्धन टाउनशिप, और अध्याय रियल्टी इंफ्रास्ट्रक्चर जैसी कंपनियों के नाम पर थी. वहीं, करीब 17.64 करोड़ रुपये की संपत्ति हाईनेस इंफ्रा डेवलपर्स के नाम पर दर्ज मिली.
ठगी का वो ‘मायाजाल’ जिसमें फंसे हजारों लोग
रोहतास ग्रुप के खिलाफ यूपी पुलिस में कुल 83 एफआईआर दर्ज थीं, जिसके बाद ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग के तहत इस केस की कमान संभाली. जांच में जो खेल सामने आया, वह किसी को भी हैरान कर सकता है.
कंपनी ने ‘सुल्तानपुर रोड प्रोजेक्ट’, ‘रायबरेली रोड प्रोजेक्ट’ और ‘रोहतास प्लमेरिया’ जैसी लुभावनी टाउनशिप स्कीम लॉन्च की थीं. निवेशकों को झांसा दिया गया कि बुकिंग के 30 महीने बाद या तो उन्हें फ्लैट/प्लॉट का कब्जा मिल जाएगा, या फिर उन्हें उनकी मूल राशि का 150 प्रतिशत (डेढ़ गुना) वापस दिया जाएगा. लालच और अपने घर की चाहत में लोगों ने जमकर निवेश किया, लेकिन 30 महीने बीतने के बाद न तो घर मिला और न ही पैसा.
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पैसे घुमाने की शातिर साजिश
ईडी के मुताबिक, प्रमोटरों ने जनता के पैसे को सीधे अपनी जेब में डालने के बजाय एक पेचीदा नेटवर्क बनाया. निवेशकों का पैसा दूसरी सहयोगी कंपनियों और ‘बेनामी’ लोगों के नाम पर जमीनें खरीदने में लगा दिया गया.
इतना ही नहीं, जांच से बचने के लिए इन संपत्तियों को वर्धन टाउनशिप और अध्याय रियल्टी जैसी कंपनियों के नाम पर ट्रांसफर कर दिया गया. दीपक रस्तोगी ने तो एक कदम आगे बढ़कर इन बेनामी जमीनों को बैंकों के पास गिरवी रख दिया, ताकि वहां से ‘साफ-सुथरा’ लोन लेकर बैंकिंग फंड जुटाया जा सके.
अब तक क्या हुआ?
यह पहली बार नहीं है जब रोहतास ग्रुप पर गाज गिरी है. इससे पहले भी ईडी 110 करोड़ रुपये की 68 संपत्तियां जब्त कर चुका है. ताजा कार्रवाई के बाद अब कंपनी के प्रमोटरों के पास बचने के रास्ते बंद होते नजर आ रहे हैं. फिलहाल ईडी इस पूरे सिंडिकेट की गहराई से जांच कर रही है ताकि यह पता चल सके कि क्या इसमें कुछ और सफेदपोश लोग भी शामिल हैं.
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-भारत एक्सप्रेस
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