बाबरी मस्जिद के पूर्व पक्षकार इकबाल और आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत
Iqbal Ansari On Mohan Bhagwat: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत के ‘हिंदू-मुस्लिम एकता’ पर दिए गए एक बयान की देश भर में जमकर चर्चा हो रही है. इस बयान का सबसे बड़ा और सकारात्मक समर्थन अयोध्या से आया है. राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद के पूर्व मुख्य पक्षकार इकबाल अंसारी ने संघ प्रमुख के बयान का खुलकर स्वागत किया है. अंसारी ने कहा कि मोहन भागवत ने बिल्कुल सही कहा है और भारत की असली पहचान हिंदू-मुस्लिम भाईचारे में ही बसती है.
भागवत का वो बयान, जिसने जीता दिल
दरअसल, आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने हाल ही में न्यूयॉर्क में आयोजित ‘वन वर्ल्ड, वन ह्यूमैनिटी’ कार्यक्रम में हिस्सा लिया था. 30 देशों के 180 से अधिक प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए भागवत ने मुसलमानों को लेकर आरएसएस के नजरिए को साफ किया. उन्होंने कहा, “अगर कोई हिंदू सोचता है कि भारत में कोई मुसलमान नहीं होना चाहिए, तो वह हिंदू नहीं रहेगा. अगर आप खुद को हिंदू कहना चाहते हैं, तो आपको यह मानना होगा कि सभी रास्ते एक ही ओर ले जाते हैं और हर इंसान की एक गरिमा है.”
इकबाल अंसारी का खुला समर्थन (Iqbal Ansari Support Mohan Bhagwat)
भागवत के इसी बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए इकबाल अंसारी (Babri Masjid Litigant Iqbal Ansari) ने कहा कि हिंदुस्तान पूरी दुनिया में हिंदुओं और मुसलमानों के बीच भाईचारे और आपसी स्नेह की धरती के रूप में जाना जाता है. देश को आगे बढ़ना चाहिए और सभी को मिलकर देश की तरक्की, विकास और रोजगार पर ध्यान देना चाहिए.
#WATCH | Ayodhya, Uttar Pradesh: On RSS Chief Mohan Bhagwat’s statement regarding Hindu-Muslim unity, former plaintiff in the Babri Masjid-Ram Janmabhoomi case, Iqbal Ansari says, “Hindustan is a land of brotherhood and mutual affection between Hindus and Muslims. The nation must… https://t.co/CNwwBIuMCs pic.twitter.com/kCGO2Ocs9t
— ANI (@ANI) August 30, 2026
मोहन भागवत ने दुनिया घूमने के अपने अनुभव के आधार पर जो कहा है, वह शत-प्रतिशत सही है. अंसारी ने भागवत की तारीफ करते हुए कहा कि देश को ऐसे ही लीडर की जरूरत है, जो सबकी परवाह करे और दोनों समुदायों के बीच एकता को बढ़ाए.
‘कर्म ही सर्वोपरि है’ (Hindu Muslim Brotherhood- Mohan Bhagwat)
अपने संदेश को और गहरा बनाते हुए इकबाल अंसारी ने हिंदू धर्मग्रंथों का भी हवाला दिया. उन्होंने कहा कि लोगों का सम्मान उनके धर्म से नहीं बल्कि उनके कर्मों से होता है. गीता और रामायण का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि ईश्वर लोगों को उनके कर्मों के अनुसार फल देते हैं. “जैसा आप बोएंगे, वैसा ही काटेंगे, यही गीता का संदेश है.” अयोध्या से आई इस सकारात्मक प्रतिक्रिया ने यह साबित कर दिया है कि सौहार्द और विकास ही नए भारत की असली दिशा है.
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