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कानपुर लैंबॉर्गिनी केस: अदालत में ऐसा क्या हुआ कि मिल गई बेल? ‘मामूली एक्सीडेंट’ की दलील पर शिवम मिश्रा को मिली राहत! जानिए क्या-क्या हुआ कोर्टरूम में

कानपुर के चर्चित लैंबॉर्गिनी हादसे में आरोपी शिवम मिश्रा को 5 दिन बाद जमानत मिल गई. ACMM कोर्ट ने 14 दिन की रिमांड अर्जी खारिज कर 20 हजार रुपये के निजी मुचलके पर रिहाई का आदेश दिया. जानिए कोर्टरूम में क्या-क्या हुआ.

Shivam Mishra granted bail in Kanpur Lamborghini

Kanpur Lamborghini Case: कानपुर लैंबॉर्गिनी केस में आरोपी शिवम मिश्रा (Shivam Mishra) को एसीएमएम (ACMM) कोर्ट से जामनत मिल गई है. लेकिन अदालत ने शिवम को 20,000 रुपये के अंडरटेकिंग और 20,000 रुपये के पर्सनल बॉन्ड पर रिहा किया गाय है. कोर्ट ने पुलिस की ओर से मांगी गई 14 दिन की रिमांड अर्जी को भी खारिज कर दिया है.

5 दिन पहले हुई थी घटना (What is Kanpur Lamborghini Case) 

8 फरवरी रविवार को कानपुर के वीआईपी रोड पर तेज रफ्तार लैंबॉर्गिनी कार ने ऑटो और बुलेट सवारों को टक्कर मार दी, जिसमें चार लोग घायल हो गए. कार तंबाकू कारोबारी केके मिश्रा के बेटे शिवम मिश्रा चला रहे थे. हादसे के बाद मौके पर हंगामा हुआ. लोगों ने कार को घेर लिया लेकिन लैंबॉर्गिनी के पीछे चल रही एक अन्य कार से आए सुरक्षाकर्मियों ने चालक को निकालने का प्रयास किया, जिससे मौके पर मौजूद लोगों में आक्रोश फैल गया. इस दौरान कार का शीशा तोड़कर चालक को बाहर निकाला गया और निजी अस्पताल पहुंचाया गया था.

शिकायतकर्ता ने बदला बयान, समझौते का दावा

लैंबॉर्गिनी हादसे के मामले में आरोपी शिवम मिश्रा के वकील धर्मेंद्र सिंह ने दावा किया है कि शिकायत दर्ज कराने वाले ई-रिक्शा चालक मोहम्मद तौफीक (18) ने अपना बयान बदल दिया है. वकील के अनुसार, तौफीक ने कहा है कि आरोपी पक्ष से समझौता हो गया है और अब वह किसी कार्रवाई की मांग नहीं करता. बचाव पक्ष का कहना है कि दुर्घटना के समय कार मोहनलाल चला रहा था और पीड़ित के इलाज व नुकसान की भरपाई कर दी गई है.

कोर्ट रूम में क्या-क्या हुआ? (Kanpur Lamborghini Case Bail)

वकील ने अदालत में दलील दी कि हादसा कार की तकनीकी खराबी के कारण हुआ और यह एक मामूली सा एक्सीडेंट था. इसमें केवल मामूली चोट आई थी. उनका कहना है कि महंगी गाड़ी और बड़े परिवार से संबंध होने के कारण मामले को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया.

बचाव पक्ष ने आरोप लगाया कि पुलिस ने कानून के विपरीत तरीके से शिवम को गिरफ्तार किया और 14 दिन की रिमांड मांगी. कोर्ट ने जब पूछा कि गिरफ्तारी क्यों की गई, तो पुलिस ने कहा कि आरोपी जांच में सहयोग नहीं कर रहा था. हालांकि, नोटिस देने के संबंध में पुलिस संतोषजनक जवाब नहीं दे पाई. अदालत ने 7 साल से कम सजा वाले मामलों में गिरफ्तारी के प्रावधानों का हवाला देते हुए रिमांड अर्जी खारिज कर दी और शिवम को 20 हजार रुपये के निजी मुचलके और जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया.


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स्वास्थ्य का भी हवाला

वकील ने यह भी कहा कि शिवम को विधिवत नोटिस नहीं दिया गया और वह बीमार है. उन्होंने बताया कि शिवम को हाई ब्लड प्रेशर और शुगर की समस्या है. फिलहाल उसे जमानत मिल चुकी है और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है.

-भारत एक्सप्रेस



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