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‘नेकी कर कुएं में डाल…’ उत्तर प्रदेश चुनाव से पहले संघ प्रमुख मोहन भागवत ने दिया लोगों को जुड़ने का मंत्र

उत्तर प्रदेश में 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने मेरठ में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए संघ से जुड़े रहने और अन्य लोगों को जोड़ने के लिए पांच मंत्र दिया है.

RSS Chief Mohan Bhagwat on Ram mandir Inauguration

संघ प्रमुख मोहन भागवत.

उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 के विधानसभा चुनावों की तैयारी होने लगी है. इसी बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने मेरठ में कार्यकर्ताओं को संबोधित किया है.

मेरठ के कार्यक्रम में भागवत ने कार्यकर्ताओं को पांच मंत्र दिया. जिसमें सबसे ज्यादा चर्चा उनके पांचवें मंत्र की हो रही है. उन्होंने कहा कि अगर आप समाज के लिए कुछ अच्छा कर रहे हैं, तो उसे पूरी ईमानदारी और निस्वार्थ भाव से करें.

अक्सर चुनावों के वक्त नेताओं में टिकट और सीटों की होड़ मच जाती है, लेकिन भागवत ने कहा कि “काम ऐसा करो कि उसमें टिकट या सीट की कोई मांग न हो. नेकी करो और कुएं में डालो.” उन्होंने यह भी कहा कि अगर कोई व्यक्ति संघ का नाम तक नहीं जानता, लेकिन देश के लिए अच्छा कार्य कर रहा है, तो संघ उसे अपना ही सदस्य मानेगा. उनका सीधा संदेश था कि काम ‘एक्सीलेंस’ के साथ होना चाहिए, न कि किसी स्वार्थ के लिए.

भागवत ने दी जाति-व्यवस्था पर नई सोच की प्रेरणा

इससे पहले लखनऊ के कार्यक्रम में भी भागवत के तेवर काफी स्पष्ट थे. उन्होंने सामाजिक भेदभाव और छुआछूत को जड़ से मिटाने की वकालत की है. उन्होंने कहा कि जाति कोई ऐसी व्यवस्था नहीं है जो हमेशा के लिए बनी रहे. आज के दौर में यह सिर्फ एक अव्यवस्था बन चुकी है.

भागवत ने कहा कि जाति पहले काम के आधार पर थी, लेकिन आज हर व्यक्ति हर काम करने के लिए स्वतंत्र है. समाज में ऊंच-नीच की दीवारें गिर रही हैं और नई पीढ़ी (युवा वर्ग) इस बदलाव को अपना रही है. उनका कहना था कि जब हम खुद को हिंदू और भारत माता का पुत्र मानेंगे, तो जातीय विभाजन अपने आप खत्म हो जाएगी.

अक्सर आरएसएस पर पुरातनपंथी होने का आरोप लगता हैं, लेकिन भागवत ने इस पर भी अपनी राय साफ रखी. उन्होंने कहा कि संघ आधुनिकीकरण का विरोधी नहीं है, बल्कि ‘अंधानुकरण’ (बिना सोचे-समझे नकल) के खिलाफ है. उनके मुताबिक, जो नया है उसे परखें और अगर वह हमारे शाश्वत मूल्यों के साथ फिट बैठता है, तो उसे जरूर अपनाएं. बस पश्चिमी सभ्यता की अंधी नकल से बचना चाहिए.

यूजीसी रेगुलेशन जैसे संवेदनशील मुद्दे पर उन्होंने समझदारी दिखाते हुए कहा कि चूंकि मामला सुप्रीम कोर्ट में है, इसलिए जल्दबाजी में कोई भी प्रतिक्रिया देना ठीक नहीं होगा. मुख्य लक्ष्य यह होना चाहिए कि समाज में किसी भी तरह का बंटवारा न हो.

शताब्दी वर्ष का बड़ा लक्ष्य

मेरठ और लखनऊ के बाद अब मोहन भागवत का अगला पड़ाव उत्तराखंड है. 22 और 23 फरवरी को वे दो दिवसीय प्रवास पर रहेंगे. बता दें कि संघ अपने स्थापना के 100 साल पूरे होने पर ‘शताब्दी वर्ष’ मना रहा है. इसके तहत उत्तराखंड में बड़े स्तर पर हिंदू सम्मेलनों की तैयारी है. संघ ने पूरे प्रदेश में 1,000 हिंदू सम्मेलन करने का बड़ा लक्ष्य रखा है, ताकि जमीन स्तर पर लोगों को जोड़ा जा सके.

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-भारत एक्सप्रेस



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